बागी सांसदों को कल्याण बनर्जी ने दी नसीहत, कहा- संकट के समय पार्टी को छोड़ना नैतिकता नहीं,... इस्तीफा दीजिए फिर...

Edited By Updated: 09 Jun, 2026 02:20 PM

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने मंगलवार को पार्टी के बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर राजनीतिक नैतिकता की कमी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंध रखने और संकट के समय पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़ने का आरोप...

नेशनल डेस्क: तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद ने मंगलवार को पार्टी के बागी सांसदों पर तीखा हमला बोलते हुए उन पर राजनीतिक नैतिकता की कमी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंध रखने और संकट के समय पार्टी कार्यकर्ताओं को छोड़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी को संकट में छोड़ना नैतिकता नहीं हैं अगर आप को कहीं जाना है तो पहले पार्टी से इस्तीफा दीजिए फिर कहीं जाएं। यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह प्रेस वार्ता उन दावों के जवाब में बुलाई गई है, जिनमें बागी सांसदों ने कहा था कि लोकसभा में पार्टी के अधिकतर सांसद उनके समर्थन में हैं और वे एक अलग गुट के रूप में मान्यता लेने की तैयारी कर रहे हैं।

बागी 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र 
तृणमूल सांसद काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी गुट ने सोमवार को दावा किया था कि वे लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के समर्थन की घोषणा करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि पार्टी के लगभग 20 सांसद उनके साथ हैं। 

बागी सांसद नैतिकता दिखाएं 
बनर्जी ने तृणमूल के पूर्व राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ आरोप लगाकर और इस्तीफा देकर नैतिकता का उदाहरण प्रस्तुत किया, और बागी सांसदों को भी यही रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''अगर आप पार्टी पर आरोप लगा रहे हैं तो नैतिकता दिखाइए और सांसद पद से इस्तीफा दीजिए।

बागी नेता प्रभावी रूप से भाजपा के साथ खड़े हैं 
असंतुष्ट खेमे द्वारा कथित तौर पर जारी एक पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने कहा कि इतना महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बागी नेता प्रभावी रूप से भाजपा के साथ खड़े हो गए हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक का उल्लेख किया। बनर्जी ने कहा कि कुछ सांसदों ने अब अपनी राजनीतिक निष्ठा बदल ली है और वे ममता बनर्जी से अलग हो कर नरेन्द्र मोदी के साथ चले गए हैं। 

पार्टी के भीतर बागी गुटबाजी से बढ़ा तनाव 
कीर्ति आजाद ने भी बागी सांसदों पर पार्टी को धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि यदि वे भाजपा के साथ जाना चाहते हैं तो इसे खुले तौर पर स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि यह पार्टी के प्रति विश्वासघात है और ऐसे लोग तृणमूल कांग्रेस के नाम का इस्तेमाल न करें। कीर्ति आज़ाद ने सांसद काकोली घोष दस्तीदार पर भी निशाना साधते हुए उनके चुनावी रिकॉर्ड और पार्टी में भूमिका पर सवाल उठाए। तृणमूल नेताओं के इस हमले के साथ ही पार्टी के भीतर बागी गुट और नेतृत्व के बीच तनाव और बढ़ गया है।

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