अमेरिका का दो टूक संदेशः कश्मीर भारत-पाक का निजी मामला, दखल देने की कोई इच्छा नहीं

Edited By Updated: 25 Sep, 2025 06:23 PM

kashmir a direct issue between india and pakistan us

अमेरिका ने साफ कर दिया कि कश्मीर केवल भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है। अमेरिका इसमें दखल देने में इच्छुक नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने संघर्ष रोका, लेकिन वास्तविकता यह है कि अमेरिका केवल अंतरिम युद्धविराम में मदद कर सकता है।

Washington: अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच का “सीधा मुद्दा” है और अमेरिका इसमें दखल देने में कोई रुचि नहीं रखता। अधिकारी ने कहा कि अमेरिका की दीर्घकालिक नीति यह रही है कि यह मसला केवल भारत और पाकिस्तान के बीच ही सुलझाया जाना चाहिए।विदेश विभाग के अधिकारी ने कहा कि अगर किसी मुद्दे पर अमेरिका से सहयोग मांगा जाए तो वह मदद के लिए तैयार है, लेकिन कश्मीर के मामले में वह पूरी तरह भारत और पाकिस्तान पर छोड़ दिया गया है। अधिकारी ने संवाददाताओं से कहा, “हमें भारत और पाकिस्तान के बीच दखल देने में कोई रुचि नहीं है।”

 

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोका है। हालांकि विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका केवल अंतरिम तौर पर युद्धविराम में मदद कर सकता है, लेकिन यह पाकिस्तान द्वारा उत्पन्न संकट का स्थायी समाधान नहीं है। भारत का कहना है कि आतंकवाद और सीमा पार हमलों जैसे गंभीर मुद्दों पर पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत ही होनी चाहिए। भारत किसी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं करना चाहता क्योंकि पाकिस्तान अक्सर बहाने बनाकर मामलों में उलझाव पैदा करता है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका का यह स्पष्ट रुख पाकिस्तान को संदेश है कि वह अपनी हरकतों से बाज आए। कश्मीर और आतंकवाद जैसे मामलों में पाकिस्तान की भूमिका लगातार विवादस्पद रही है, और भारत इसे केवल द्विपक्षीय तरीके से ही सुलझाने के पक्ष में है।

 

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