डायबिटीज और High BP वालों की किडनी पर मंडरा रहा संकट, इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Edited By Updated: 19 Mar, 2026 03:51 PM

kidney failure symptoms for diabetes and high blood pressure patients

किडनी की बीमारी एक 'साइलेंट किलर' है, जो हाई बीपी और डायबिटीज के मरीजों में चुपचाप पनपती है।

Kidney Failure Symptoms: देश में किडनी की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि किडनी की बीमारी एक 'साइलेंट किलर' की तरह शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। चौंकाने वाली बात यह है कि किडनी के 40% तक खराब होने के बावजूद मरीज को किसी खास दर्द या समस्या का अहसास नहीं होता, जिससे इलाज में अक्सर देरी हो जाती है। 

क्यों है यह 'खामोश' खतरा? 

किडनी हमारे शरीर का वह फिल्टर है जो खून से गंदगी और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी और कमी दोनों यही है कि अगर किडनी का एक हिस्सा खराब हो जाए, तो बाकी हिस्सा उसका काम संभाल लेता है। इसी 'एडजस्टमेंट' के कारण शुरुआती दौर में कोई लक्षण नजर नहीं आते। 

ये दो बीमारियां हैं सबसे बड़ी दुश्मन 

डॉक्टरों के अनुसार, दो मुख्य स्थितियां किडनी फेलियर का सबसे बड़ा कारण बनती हैं: 

हाई ब्लड प्रेशर: लंबे समय तक बढ़ा हुआ बीपी किडनी की बारीक खून की नलियों को डैमेज कर देता है, जिससे उसकी सफाई करने की क्षमता घट जाती है। 

टाइप 2 डायबिटीज: खून में शुगर का बढ़ा हुआ स्तर किडनी के फिल्टर (ग्लोमेरुली) पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसे चिकित्सा विज्ञान में 'Diabetic Nephropathy' कहा जाता है, जो अंततः किडनी फेलियर का कारण बनती है। 

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज 

जब बीमारी गंभीर चरण में पहुंचती है, तब शरीर ये संकेत देने लगता है: 

  • पैरों, टखनों या हाथों में असामान्य सूजन। 
  • बिना किसी भारी काम के जल्दी थकान महसूस होना। 
  • रात के समय बार-बार पेशाब आने की समस्या। 
  • त्वचा में लगातार खुजली और एकाग्रता (Focus) में कमी। 

स्वस्थ रहने के 5 स्वर्ण नियम: 

नमक पर नियंत्रण: खाने में ऊपर से नमक डालने से बचें। 

दवाइयों से सावधानी: डॉक्टर की सलाह के बिना पेनकिलर्स का सेवन न करें। 

सक्रिय जीवन: रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें। 

शुगर-बीपी कंट्रोल: अपनी मशीनों और रूटीन चेकअप के जरिए इन्हें सामान्य रखें। 

सही खान-पान: जंक फूड की जगह हरी सब्जियां और फलों को प्राथमिकता दें। 

बचाव और जांच ही एकमात्र समाधान 

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप हाई बीपी या डायबिटीज के मरीज हैं, तो हर 6 महीने में यूरिन और ब्लड टेस्ट (eGFR) जरूर करवाएं। 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!