Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Jan, 2026 12:46 PM

केंद्र सरकार ने बुधवार को चार प्रमुख श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियम जारी कर आम जनता और उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इन नियमों के लागू होने के बाद ही नए श्रम कानून देशभर में पूरी तरह प्रभावी होंगे। जिन चार संहिताओं की अधिसूचना पहले ही जारी...
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने बुधवार को चार प्रमुख श्रम संहिताओं के लिए मसौदा नियम जारी कर आम जनता और उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इन नियमों के लागू होने के बाद ही नए श्रम कानून देशभर में पूरी तरह प्रभावी होंगे। जिन चार संहिताओं की अधिसूचना पहले ही जारी हो चुकी है, उनमें वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियों की संहिता 2020 शामिल हैं।
सरकार की योजना है कि 1 अप्रैल, 2026 से ये सभी कानून पूरे देश में लागू हों। चूंकि श्रम मामले संविधान की समवर्ती सूची में आते हैं, इसलिए राज्य स्तर पर भी इनके लिए नियम बनाना आवश्यक है। इसी प्रक्रिया में राज्य सरकारें भी नियमों की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर रही हैं। केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने औद्योगिक संबंध संहिता पर 30 दिन और अन्य तीन संहिताओं पर 45 दिन का सुझाव देने की अवधि दी है। इस कदम से उद्योग और श्रमिकों को नए नियमों की स्पष्ट जानकारी और मार्गदर्शन मिलेगा।
नए कानून श्रमिकों के अधिकारों और सुविधाओं को मजबूत करेंगे
मसौदा नियम लागू होने के बाद कई नई सुविधाओं को अनिवार्य किया जाएगा। इसमें शामिल हैं:
सभी श्रमिकों को नियुक्ति पत्र प्रदान करना
40 वर्ष और उससे अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए मुफ्त मेडिकल चेक-अप
समान काम के लिए समान वेतन की गारंटी
महिलाओं के लिए विभिन्न शिफ्ट में समान अवसर
केंद्र का उद्देश्य इन संहिताओं के माध्यम से श्रमिकों के संरक्षण का दायरा बढ़ाना, व्यापार संचालन को सरल बनाना और कर्मचारियों-केंद्रित कार्यस्थल को प्रोत्साहित करना है।
सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने का लक्ष्य
केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया ने बताया कि सरकार मार्च, 2026 तक 100 करोड़ श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य रखती है। वर्तमान में यह संख्या लगभग 94 करोड़ है। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2025 तक 64% से अधिक हो गया है, जबकि 2015 में यह केवल 19% था।
वेतन में कटौती पर नई सीमा तय
नए कानूनों के तहत कर्मचारियों की वेतन कटौती (डिडक्शन्स) की सीमा भी तय की गई है। किसी भी कर्मचारी की कुल वेतन से 50% से अधिक कटौती नहीं की जा सकेगी। इसमें बेसिक सैलरी, डीए और अन्य भत्ते शामिल होंगे, जो CTC का अधिकतम 50% ही हो सकते हैं। शेष 50% में एचआरए, बोनस, कमीशन, पीएफ और अन्य लाभ शामिल होंगे। यदि ये भत्ते 50% की सीमा से अधिक होते हैं, तो अतिरिक्त राशि सीधे सैलरी में जोड़ी जाएगी।