1 अप्रैल 2026 से HRA के नए नियम लागू: अब रिश्तेदारों को किराया देने पर मकान मालिक से रिश्ता बताना होगा

Edited By Updated: 27 Feb, 2026 08:39 AM

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अगर आप अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में कटने से बचाने के लिए अपने माता-पिता या रिश्तेदारों को किराया देने का तरीका अपनाते हैं, तो अब आपको अपनी तैयारी और भी पुख्ता करनी होगी। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही इनकम टैक्स विभाग अपनी जांच का दायरा बढ़ा...

नेशनल डेस्क:  अगर आप अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में कटने से बचाने के लिए अपने माता-पिता या रिश्तेदारों को किराया देने का तरीका अपनाते हैं, तो अब आपको अपनी तैयारी और भी पुख्ता करनी होगी। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही इनकम टैक्स विभाग अपनी जांच का दायरा बढ़ा रहा है। अब महज एक कागजी रेंट एग्रीमेंट आपकी फाइल को पास कराने के लिए काफी नहीं होगा। सरकार एक ऐसा सिस्टम ला रही है जहाँ रिश्तों और रुपयों के बीच की पारदर्शिता को सीधे तौर पर परखा जाएगा।

अब रिश्तों का खुलासा करना होगा अनिवार्य
नए वित्तीय नियमों के मसौदे में यह साफ कर दिया गया है कि HRA क्लेम करते समय आपको यह बताना होगा कि आपका मकान मालिक आपका क्या लगता है। अगर आप अपने ही खून के रिश्तों को किराया चुका रहे हैं, तो इसे फॉर्म में डिक्लेयर करना अब आपकी जिम्मेदारी होगी। यह कदम उन फर्जी रसीदों पर लगाम लगाने के लिए उठाया जा रहा है, जो सिर्फ टैक्स चोरी के मकसद से तैयार की जाती हैं।

रसीदों से आगे बढ़कर मांगें जाएंगे सबूत
सिर्फ मकान मालिक का पैन कार्ड और रेंट एग्रीमेंट जमा कर देना अब बीते जमाने की बात हो जाएगी। आने वाले समय में विभाग आपसे यह उम्मीद करेगा कि आपके पास इस किराए के भुगतान का ठोस आधार हो। अगर आप किसी रिश्तेदार के साथ एक ही घर में रह रहे हैं, तो विभाग यह जांच सकता है कि क्या वास्तव में वह संपत्ति किराए पर दी गई है या यह केवल कागजी खेल है।

बैंक ट्रांजैक्शन बनेगा आपका ढाल
अब कैश में किराया देना आपको भारी मुसीबत में डाल सकता है। नए दौर में अगर आप चाहते हैं कि आपका HRA क्लेम रिजेक्ट न हो, तो बैंकिंग चैनलों (जैसे UPI, चेक या नेट बैंकिंग) का इस्तेमाल करना ही समझदारी है। डिजिटल लेनदेन का रिकॉर्ड आपकी ईमानदारी का सबसे बड़ा प्रमाण होगा, जो किसी भी पूछताछ के समय आपको टैक्स नोटिस से बचा सकता है।

मकान मालिक की जिम्मेदारी भी बढ़ी
यह खेल अब एकतरफा नहीं रहा। आप जो किराया अपनी छूट के लिए दिखा रहे हैं, वही राशि आपके रिश्तेदार (मकान मालिक) की इनकम टैक्स रिटर्न में 'हाउस प्रॉपर्टी से आय' के तौर पर दिखनी चाहिए। अगर आपके और उनके डेटा में जरा सा भी अंतर पाया गया, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देगा, जिससे आप दोनों के लिए कानूनी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

बिना डरे कैसे लें टैक्स लाभ?
सरकार रिश्तेदारों को किराया देने के खिलाफ नहीं है, बस वह इसकी सच्चाई जानना चाहती है। अगर आपका लेनदेन वास्तविक है, आप सच में किराया दे रहे हैं और आपके पास उसके बैंकिंग सबूत मौजूद हैं, तो आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है। बस 1 अप्रैल से पहले अपनी जानकारी को पारदर्शी बनाने की आदत डाल लें, ताकि जुर्माने और नोटिस की नौबत ही न आए।

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