Edited By Mansa Devi,Updated: 12 Mar, 2026 11:34 AM

अक्सर दोस्ती या रिश्तेदारी निभाने के लिए लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे किसी के लोन के गारंटर (Loan Guarantor) बन जाते हैं। उस समय यह सिर्फ एक औपचारिक सिग्नेचर जैसा लगता है, लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि कानून के अनुसार गारंटर की जिम्मेदारी भी उतनी ही...
नेशनल डेस्क: अक्सर दोस्ती या रिश्तेदारी निभाने के लिए लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे किसी के लोन के गारंटर (Loan Guarantor) बन जाते हैं। उस समय यह सिर्फ एक औपचारिक सिग्नेचर जैसा लगता है, लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि कानून के अनुसार गारंटर की जिम्मेदारी भी उतनी ही होती है जितनी लोन लेने वाले की होती है। अगर कर्ज लेने वाला व्यक्ति किसी कारण से लोन नहीं चुकाता, तो बैंक सीधे गारंटर से पूरी रकम वसूल सकता है। इसलिए गारंटर बनने से पहले इसके कानूनी पहलुओं को समझना बेहद जरूरी है।
कानून में गारंटर की जिम्मेदारी क्या है?
भारत में लोन गारंटी से जुड़े नियम Indian Contract Act, 1872 में बताए गए हैं। इस कानून की कुछ धाराएं गारंटर की जिम्मेदारी को स्पष्ट करती हैं।
धारा 126 (Section 126)
यह धारा गारंटी के अनुबंध की परिभाषा बताती है। इसके अनुसार अगर लोन लेने वाला व्यक्ति यानी Principal Debtor कर्ज चुकाने में असफल हो जाता है, तो गारंटर यानी Surety को उस कर्ज की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है।
धारा 128 (Section 128)
यह धारा गारंटर के लिए सबसे अहम मानी जाती है। इसमें कहा गया है कि गारंटर की जिम्मेदारी Co-extensive होती है। इसका मतलब है कि लोन की जितनी जिम्मेदारी कर्जदार की है, उतनी ही गारंटर की भी है। बैंक चाहे तो कर्जदार के पास जाने के बजाय सीधे गारंटर से पैसा मांग सकता है।
अगर कर्जदार लोन नहीं चुकाता तो गारंटर के साथ क्या हो सकता है?
बैंक सीधे गारंटर से वसूली कर सकता है अगर लोन लेने वाला व्यक्ति EMI देना बंद कर देता है, तो बैंक सबसे पहले नोटिस भेजता है। इसके बाद बैंक गारंटर से पूरी बकाया रकम, ब्याज और जुर्माना वसूल सकता है। अगर गारंटर भी भुगतान नहीं करता, तो बैंक कोर्ट में मामला ले जा सकता है।
सैलरी या संपत्ति पर असर
कानूनी प्रक्रिया के बाद बैंक गारंटर की सैलरी से पैसे कटवाने या उसकी चल-अचल संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई भी कर सकता है। यानी कर्जदार की गलती का असर सीधे गारंटर की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।
CIBIL स्कोर खराब हो सकता है
लोन डिफॉल्ट होने की स्थिति में सिर्फ कर्जदार का ही नहीं, बल्कि गारंटर का क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) भी खराब हो जाता है। इससे भविष्य में गारंटर को खुद के लिए होम लोन, कार लोन या कोई अन्य कर्ज लेना मुश्किल हो सकता है।
कानूनी मुकदमे का सामना
चूंकि गारंटर ने लोन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए होते हैं, इसलिए बैंक उसके खिलाफ भी कोर्ट में केस कर सकता है। ऐसे में गारंटर यह नहीं कह सकता कि उसने पैसा इस्तेमाल नहीं किया, क्योंकि कानूनी रूप से वह भी जिम्मेदार माना जाता है।
क्या गारंटर के पास कोई कानूनी अधिकार भी हैं?
गारंटर को कानून कुछ अधिकार भी देता है।
धारा 140
अगर गारंटर बैंक का पूरा कर्ज चुका देता है, तो उसके बाद उसे बैंक के अधिकार मिल जाते हैं। यानी वह उस व्यक्ति से पैसा वापस लेने के लिए कानूनी कार्रवाई कर सकता है जिसने लोन लिया था।
धारा 141
अगर बैंक के पास कर्जदार की कोई सिक्योरिटी (जैसे सोना, संपत्ति के कागज आदि) थी और बैंक ने उसे बिना गारंटर की अनुमति के छोड़ दिया, तो ऐसी स्थिति में गारंटर की जिम्मेदारी कम हो सकती है।
गारंटर बनने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?
गारंटर बनने से पहले यह जरूर जांच लें कि लोन लेने वाला व्यक्ति आर्थिक रूप से कितना भरोसेमंद है। कोशिश करें कि आप पूरी रकम के बजाय सिर्फ एक सीमित हिस्से के लिए गारंटर बनें। लोन लेने वाले व्यक्ति से कहें कि वह टर्म इंश्योरेंस ले ले, ताकि किसी अनहोनी की स्थिति में लोन का बोझ गारंटर पर न आए। लोन से जुड़े सभी दस्तावेज और शर्तें ध्यान से पढ़कर ही हस्ताक्षर करें।