Edited By Sahil Kumar,Updated: 25 Jun, 2026 01:46 PM

दिल्ली सरकार ने राजधानी में सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम उठा रही है। सरकार ने 15 साल से ज्यादा पुराने 44 फ्लाईओवरों और ग्रेड सेपरेटरों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने PWD को 11 करोड़ की राशि प्रदान कर दी है।
नेशनल डेस्कः दिल्ली सरकार ने राजधानी में सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए अहम कदम उठा रही है। सरकार ने 15 साल से ज्यादा पुराने 44 फ्लाईओवरों और ग्रेड सेपरेटरों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने PWD को 11 करोड़ रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।
सरकार के अनुसार भविष्य में कोई संभावित दुर्घटना से पहले ही जरूरी कदम उठाना और शहर के मौजूदा बुनियादी ढांचे को सुरक्षित रखना उसकी प्राथमिकता है। दिल्ली के कई फ्लाईओवर में रोजाना लाखों लोग गुजरते हैं। कई फ्लाईओवर का निर्माण वर्ष 1982 से 2010 के बीच हुआ था। बढ़ती ट्रैफिक के बीच इनकी देखभाल जरुरी है।
PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने कहा कि इसका उद्देश्य सार्वजनिक संपत्तियों को मजबूत करना और नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि तेजी से विकसित हो रही दिल्ली में विकास के साथ-साथ सुरक्षा भी जरुरी है। इसलिए पुराने फ्लाईओवरों की जांच करना आवश्यक है ताकि भविष्य में कोई खतरा ना हो।
इस योजना के तहत एक विशेषज्ञ कंसल्टेंट एजेंसी नियुक्त की जाएगी, जो फ्लाईओवरों और ग्रेड सेपरेटरों का मूल्यांकन करेगी। जांच के दौरान जहां कहीं मरम्मत की आवश्यकता होगी वहां मरम्मत करवाई जाएगी।
ऑडिट सूची में आईपी एस्टेट रिंग रोड इंटरसेक्शन, नांगिया पार्क-शक्ति नगर आरयूबी, नारायणा फ्लाईओवर, मंगोलपुरी फ्लाईओवर, लाजपत नगर-श्रीनिवासपुरी फ्लाईओवर, सराय काले खां फ्लाईओवर, सफदरजंग (AIIMS) फ्लाईओवर, डीएनडी फ्लाईओवर, अफ्रीका एवेन्यू-अरुणा आसफ अली मार्ग फ्लाईओवर, आजादपुर ग्रेड सेपरेटर और गाजीपुर फ्लाईओवर सहित कई महत्वपूर्ण संरचनाएं शामिल हैं।
कुछ फ्लाईओवरों को उनकी खराब स्थिति के आधार पर भी सूची में शामिल किया गया है। नारायणा, मंगोलपुरी और लाजपत नगर-श्रीनिवासपुरी फ्लाईओवर को लेकर पहले ही कई शिकायतें सामने आ चुकी हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए एंड्रयूज गंज फ्लाईओवर को भी इस सूची में जोड़ा गया है। इस स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद दिल्ली के पुराने फ्लाईओवर नेटवर्क की एक विस्तृत ‘हेल्थ रिपोर्ट’ तैयार होगी। जिसके आधार पर ही सरकार तय करेगी कि कहां पर तत्काल मरम्मत की जरूरत है।