Edited By Pardeep,Updated: 29 Aug, 2026 09:49 PM

महाराष्ट्र में प्रशासनिक गलियारों और राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल मच गई है। मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहे अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठ खड़ी हुई है। यह मांग दक्षिण...
मुंबई: महाराष्ट्र में प्रशासनिक गलियारों और राजनीति में एक बार फिर बड़ी हलचल मच गई है। मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रहे अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठ खड़ी हुई है। यह मांग दक्षिण मुंबई के गिरगांव क्षेत्र से जुड़े एक मराठी संगठन 'आम्ही गिरगावकर' ने की है। संगठन ने अपनी इस मांग को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक विस्तृत पत्र भेजा है, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र के वर्तमान हालातों और मराठी समाज के हितों को लेकर कई गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं।
"बिना राजनीतिक दबाव के फैसले लेने वाला निडर नेतृत्व जरूरी"
'आम्ही गिरगावकर' संगठन का दावा है कि महाराष्ट्र और मराठी समाज के हितों की रक्षा के लिए तुकाराम मुंढे जैसे बेहद निडर, ईमानदार और सख्त प्रशासनिक अधिकारी की जरूरत है। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में बिना किसी राजनीतिक दबाव के केवल तुकाराम मुंढे ही महाराष्ट्र के हित में साहसिक फैसले ले सकते हैं।
संगठन ने पत्र में गृह मंत्री अमित शाह से मांग की है कि मराठी भाषियों के साथ हो रहे कथित अन्याय को रोकने के लिए नए और सख्त कानून बनाए जाएं। मुंबई में बन रही नई इमारतों में मराठी परिवारों के लिए घर आरक्षित करने की विशेष व्यवस्था की जाए। साथ ही मुंबई की बेशकीमती संपत्तियों, आरक्षित मैदानों और सार्वजनिक जमीनों को भू-माफियाओं और रसूखदार लोगों के कब्जे से बचाने के लिए कठोर प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
मराठी परिवारों को फ्लैट न देने और कोली समाज की अनदेखी पर जताई चिंता
संगठन ने अपने पत्र में मुंबई के रियल एस्टेट सेक्टर और स्थानीय व्यवसायों से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों पर भी प्रकाश डाला है:
- फ्लैट देने से इनकार: कुछ बिल्डरों पर आरोप लगाया गया है कि वे मराठी लोगों को जानबूझकर फ्लैट और घर बेचने से मना कर रहे हैं। संगठन ने ऐसे मामलों पर नकेल कसने के लिए कड़ा कानून बनाने की मांग की है।
- मछुआरों पर पाबंदी: मुंबई के कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में स्थानीय कोली (मछुआरा) समुदाय के लोगों को मछली बेचने से रोका जा रहा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट आ गया है।
- बाहरी धनाढ्यों का कब्जा: पत्र में दावा किया गया है कि मुंबई के आरक्षित खेल मैदान, महत्वपूर्ण भूखंड और प्रमुख बंदरगाह धीरे-धीरे स्थानीय लोगों के हाथ से निकलकर बाहरी धनाढ्य लोगों के नियंत्रण में जा रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए तुरंत कड़े प्रशासनिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
राज ठाकरे की सराहना और सरकार पर तीखा निशाना
पत्र में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे की खुलकर तारीफ की गई है। संगठन ने बालासाहेब ठाकरे का जिक्र करते हुए लिखा: "अगर कोई यह सोच रहा है कि आज वंदनीय बालासाहेब ठाकरे हयात नहीं हैं, इसलिए वे मुंबई पर कब्जा कर लेंगे, तो वे इस भ्रम से बाहर आ जाएं। क्योंकि आज भी राजसाहेब ठाकरे इस सब को रोकने के लिए मजबूती से खड़े हैं।"
इसके साथ ही, संगठन ने सरकार की नीतियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। उनका आरोप है कि बाहरी लोगों के लिए तो सरकार तमाम तरह की योजनाएं बना रही है, लेकिन मुंबई की सेवा करने वाले पुलिसकर्मियों, महानगर पालिका (मनपा) कर्मचारियों, मिल मजदूरों और दमकल कर्मियों को मुफ्त आवास उपलब्ध कराने जैसे बुनियादी मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन से भी बड़े आंदोलन की चेतावनी
पत्र के अंत में संगठन ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि मराठी समाज के इन संवेदनशील मुद्दों को हल्के में न लिया जाए। यदि इन मांगों और जनभावनाओं पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो राज्य में 'संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन' से भी अधिक उग्र और व्यापक आंदोलन की चिंगारी भड़क सकती है। इस पत्र के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में तुकाराम मुंढे की भूमिका और मराठी अस्मिता के मुद्दों पर एक नई बहस छिड़ना तय माना जा रहा है।