Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 13 Mar, 2026 05:53 PM

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाना होगा।
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की भाषा और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सभी स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाना होगा। यदि कोई स्कूल इस नियम का पालन नहीं करता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। स्कूल शिक्षा मंत्री Dadaji Bhuse ने विधानसभा में यह जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह नियम सभी प्रकार के स्कूलों पर लागू होगा।
सभी बोर्ड के स्कूलों पर लागू होगा नियम
सरकार के नए निर्देश के अनुसार मराठी भाषा पढ़ाना अब सभी स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा। इसमें सरकारी स्कूल, निजी स्कूल,Central Board of Secondary Education (CBSE) से संबद्ध स्कूल, Council for the Indian School, Certificate Examinations (ICSE) स्कूल, और अंतरराष्ट्रीय बोर्ड से जुड़े स्कूल शामिल हैं। यह नियम कक्षा 1 से 10 तक लागू रहेगा।
दरअसल, सरकार को शिकायतें मिल रही थीं कि खासकर मुंबई के कई अंग्रेजी माध्यम और अंतरराष्ट्रीय स्कूल मराठी को सिर्फ तीसरी भाषा या वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ा रहे हैं। अब सरकार ने इस पर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है।
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर होगी कार्रवाई
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई स्कूल इस निर्देश का पालन नहीं करता है तो उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे स्कूलों की मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है। आने वाले शैक्षणिक सत्र से पहले राज्य सरकार ऐसे संस्थानों का विशेष निरीक्षण भी कराएगी।
प्री-प्राइमरी स्कूलों के लिए भी नए नियम
विधानसभा में चर्चा के दौरान निजी प्री-प्राइमरी स्कूलों से जुड़ी कई शिकायतें भी सामने आईं। इनमें मुख्य रूप से अत्यधिक फीस वसूली,प्रवेश के समय बच्चों और अभिभावकों का इंटरव्यू और नियमों की कमी शामिल हैं।
अब सरकार ने तय किया है कि सभी प्री-प्राइमरी स्कूलों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। अब तक राज्य में लगभग 12,633 प्री-प्राइमरी स्कूलों का पंजीकरण किया जा चुका है और बाकी स्कूलों को भी जल्द रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
नए कानून में क्या होंगे प्रावधान
राज्य सरकार जल्द ही एक नया अधिनियम लागू करने की तैयारी में है, जिसमें स्कूलों के लिए कई मानक तय किए जाएंगे।
इनमें शामिल होंगे:
- कक्षाओं का आकार और आधारभूत सुविधाएं
- शौचालय और छात्र सुरक्षा से जुड़े नियम
- स्कूल परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था
- फीस नियमन की व्यवस्था
- हर 20 छात्रों पर कम से कम 1 शिक्षक का प्रावधान
विधानसभा में उठा था मुद्दा
यह मुद्दा विधानसभा में कई विधायकों ने उठाया था। इसमें Haroon Khan समेत अन्य विधायकों ने स्कूलों में मराठी भाषा की अनदेखी पर सवाल उठाए थे। इसके बाद शिक्षा मंत्री ने सरकार का रुख स्पष्ट किया।
मराठी भाषा को बढ़ावा देने की कोशिश
राज्य सरकार का मानना है कि यह फैसला मराठी भाषा और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए जरूरी है। सरकार के मुताबिक मराठी को हाल ही में क्लासिकल भाषा का दर्जा मिलने के बाद इसे शिक्षा व्यवस्था में और मजबूत बनाना अहम है।