Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Aug, 2026 12:16 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 23 जुलाई का वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने के मामले में संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के CEO मार्क ज़करबर्ग को 3 दिन की डेडलाइन दी है। समिति ने मार्क ज़करबर्ग को माफ़ी मांगने और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के...
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 23 जुलाई का वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने के मामले में संसदीय स्थायी समिति ने मेटा के CEO मार्क ज़करबर्ग को 3 दिन की डेडलाइन दी है। समिति ने मार्क ज़करबर्ग को माफ़ी मांगने और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।
कम्युनिकेशन और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने चेतावनी दी है कि अगर मेटा इस मामले में कदम नहीं उठाता, तो कंपनी को मिलने वाली 'सेफ हार्बर प्रोटेक्शन' (कानूनी सुरक्षा) पर पुनर्विचार किया जा सकता है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता आसान हो सकता है।
पैनल ने वीडियो हटाना लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान
BJP सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली समिति ने प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो को अस्थायी रूप से हटाए जाने की कड़ी आलोचना की। समिति ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पैनल ने कहा कि अगर Facebook इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं करता और उचित जवाब नहीं देता, तो कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं।
विरोध के बाद वीडियो किया गया बहाल
यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले Instagram पर साझा किया था, जिसके बाद इसे Facebook पर भी पोस्ट किया गया। वीडियो में उन्होंने Gen Z युवाओं को संबोधित करते हुए छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बात की थी। Facebook पर मौजूद वीडियो को कुछ समय के लिए रोक दिया गया था, लेकिन आलोचना के बाद मेटा ने इसे फिर से बहाल कर दिया।
मेटा की तकनीकी खराबी वाली सफाई
मेटा के प्रतिनिधि इस मामले पर संसदीय समिति के सामने पेश हुए। कंपनी ने वीडियो हटने की घटना को तकनीकी समस्या बताया और माफ़ी मांगी। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना। मंत्रालय का कहना था कि अगर यह तकनीकी गलती थी, तो मेटा को अपने सिस्टम में सुधार करना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
CSAM कंटेंट को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को चेतावनी
संसदीय समिति ने Instagram पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट (CSAM) से संबंधित कथित मामलों पर भी चिंता जताई। समिति ने कहा कि सभी प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ऐसे कंटेंट के खिलाफ सख्त कदम उठाने होंगे। पैनल ने चेतावनी दी कि नियमों का पालन नहीं करने पर Google, YouTube, X, Facebook, WhatsApp, Instagram और Snapchat जैसे प्लेटफॉर्म्स को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध चिंता का विषय
NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों के 1,238 मामले दर्ज किए गए। इनमें से बड़ी संख्या नाबालिगों से संबंधित यौन रूप से स्पष्ट सामग्री के प्रकाशन या प्रसारण के मामलों की थी। आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में बच्चों के खिलाफ कुल अपराधों की संख्या बढ़कर 1.87 लाख हो गई, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक है।