Edited By Anu Malhotra,Updated: 02 Oct, 2026 02:27 PM

मुंबई के मलाड इलाके से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है। यहां के 'कोंकणी पाडा' इलाके में स्थित एक डे-केयर सेंटर के फ्रीज़र से पुलिस ने 78 साल के एक बुजुर्ग इंसान का शव बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, इस शव को पिछले चार सालों से भी...
मुंबई: मुंबई के मलाड इलाके से एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वाकया सामने आया है। यहां के 'कोंकणी पाडा' इलाके में स्थित एक डे-केयर सेंटर के फ्रीज़र से पुलिस ने 78 साल के एक बुजुर्ग इंसान का शव बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, इस शव को पिछले चार सालों से भी ज़्यादा समय से उस फ्रीज़र के अंदर बंद करके रखा गया था।
बदबू फैली तो खुला हैरान कर देने वाला राज
यह बात तब सामने आई जब सोमवार शाम को स्थानीय लोगों ने परिसर से आ रही तेज़ बदबू की शिकायत की। कुरार पुलिस स्टेशन की एक टीम सेंटर पहुंची और जगह की तलाशी ली, जिसके बाद उन्हें फ्रीज़र के अंदर शव मिला। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, व्यक्ति की मौत 9 जून, 2022 को कैंसर से हुई थी। मौत के बाद कथित तौर पर उनके शव को सेंटर में सुरक्षित रखा गया था।
पापा फिर ज़िंदा होंगे! पुनर्जन्म के अंधविश्वास में लिया फैसला
पुलिस सूत्रों ने बताया कि व्यक्ति के बच्चों को उम्मीद थी कि उन्हें किसी तरह फिर से जीवित किया जा सकता है। मृतक का एक बेटा मुंबई में और एक बेटी अमेरिका में रहती थी; कहा जाता है कि बेटी अपने पिता से बहुत जुड़ी हुई थी और पुनर्जन्म में विश्वास रखती थी।
हर महीने चुकाते थे 1.60 लाख रुपये का भारी-भरकम किराया
परिवार कथित तौर पर शव को उस जगह पर रखने के लिए हर महीने लगभग 1.60 लाख रुपये देता था। खबरों के मुताबिक, रिश्तेदारों ने व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) में जमा किए गए दस्तावेज़ पुलिस को सौंप दिए हैं। जांचकर्ता रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि शव को सेंटर में कब और कैसे लाया गया और उसे सुरक्षित रखने के लिए क्या इंतज़ाम किए गए थे।
डे-केयर सेंटर के मालिकों पर भी कस रहा शिकंजा
पुलिस डे-केयर सेंटर के मैनेजमेंट की भूमिका की भी जांच कर रही है और यह भी देख रही है कि क्या इसके संचालकों को शव से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में पता था। खबरों के मुताबिक, शव मिलने से करीब तीन महीने पहले ही BMC ने इस परिसर को सील कर दिया था। शव मिलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब सिविक अधिकारियों ने प्रॉपर्टी को सील किया था, तो क्या उसकी ठीक से जांच की गई थी।
पूर्व कॉर्पोरेटर ने खड़े किए प्रशासन पर सवाल
पूर्व कॉर्पोरेटर विनोद मिश्रा ने सवाल उठाया कि सीलिंग प्रक्रिया के दौरान परिसर की अच्छी तरह से जांच क्यों नहीं की गई। अभी यह पता नहीं चल पाया है कि क्या सिविक अधिकारियों को पता था कि फ्रीज़र के अंदर शव रखा हुआ था।
कूपर अस्पताल के डॉक्टरों की ली जा रही मदद
पुलिस मुंबई के कूपर अस्पताल के विशेषज्ञों से सलाह ले रही है ताकि शव की हालत का पता लगाया जा सके और यह समझा जा सके कि इसे इतने लंबे समय तक कैसे सुरक्षित रखा गया होगा। जांचकर्ता शव को रखने से जुड़ी परिस्थितियों और क्या कोई कानूनी उल्लंघन हुआ है, इसकी जांच कर रहे हैं। पुलिस ने अभी तक किसी भी मेडिकल जांच के नतीजे ज़ाहिर नहीं किए हैं।