NASA का स्विफ्ट टेलीस्कोप को बचाने का अभियान नाकाम; कभी भी टकरा सकता धरती से, भारत भी खतरे के दायरे में

Edited By Updated: 02 Nov, 2026 02:05 PM

nasa telescope is on the verge of plunging back to earth after failed mission

नासा का 22 साल पुराना स्विफ्ट टेलीस्कोप 6 नवंबर के आसपास धरती के वायुमंडल में गिर सकता है। उसे बचाने के लिए भेजा गया रोबोटिक अभियान नाकाम रहा। इसका अधिकांश हिस्सा जल जाएगा, लेकिन कुछ टुकड़े बच सकते हैं। भारत समेत कई देश संभावित गिरने वाले क्षेत्र...

Washington: अंतरिक्ष में 22 साल तक ब्रह्मांड के रहस्यों की पड़ताल करने वाला नासा का स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी टेलीस्कोप अब खुद धरती की ओर गिर रहा है। उसे बचाने के लिए चलाया गया अभियान भी नाकाम हो गया। अमेरिकी स्पेस फोर्स के अनुमान के मुताबिक, यह टेलीस्कोप 6 नवंबर के आसपास धरती के वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है। इसका ज्यादातर हिस्सा जलकर राख हो जाएगा, लेकिन कुछ भारी टुकड़े धरती तक पहुंच सकते हैं। भारत समेत कई देशों को इसके संभावित गिरने वाले क्षेत्र में रखा गया है।

 

लगातार खिसक रहा नीचे
नासा का स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी टेलीस्कोप अंतरिक्ष में अपनी कक्षा से लगातार नीचे खिसक रहा है। अमेरिकी स्पेस फोर्स के मुताबिक, यह 6 नवंबर के आसपास धरती के वायुमंडल में गिर सकता है। करीब डेढ़ टन वजनी इस टेलीस्कोप का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में प्रवेश करते ही जल जाएगा। हालांकि, सीसे से भी अधिक घनत्व वाले टंगस्टन से बने कुछ हिस्से और दर्पण के टुकड़े बचकर धरती तक पहुंच सकते हैं।

 

भारत समेत कई देश दायरे में
नासा के वैज्ञानिक ब्रैड सेंको के मुताबिक, टेलीस्कोप के कुछ हिस्से वायुमंडल में पूरी तरह नष्ट नहीं होंगे। उनके समुद्र में गिरने की आशंका अधिक है। हालांकि, इसके धरती पर लौटने का संभावित क्षेत्र काफी बड़ा है। इसमें अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया और मध्य व दक्षिण अमेरिका के हिस्से शामिल हैं। अमेरिकी स्पेस फोर्स इसकी कक्षा और गिरने की दिशा पर लगातार नजर रख रही है।

 

रोबोट भी बचाने में नाकाम
नासा ने स्विफ्ट को अंतरिक्ष में बनाए रखने के लिए करीब एक साल पहले कैटलिस्ट स्पेस कंपनी को बचाव अभियान की जिम्मेदारी दी थी। कंपनी ने जुलाई में लिंक नाम का तीन भुजाओं वाला रोबोट अंतरिक्ष में भेजा। उसका उद्देश्य टेलीस्कोप तक पहुंचकर उसकी कक्षा को ऊंचा करना था, लेकिन अभियान सफल नहीं हो सका। रोबोट टेलीस्कोप से करीब 12 से 15 किलोमीटर की दूरी तक ही पहुंच पाया और सितंबर में खुद धरती पर लौट आया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में सूर्य की तीव्र गतिविधियों के कारण धरती के वायुमंडल का ऊपरी हिस्सा अधिक फैल गया। इससे अंतरिक्ष में घूम रहे स्विफ्ट टेलीस्कोप पर खिंचाव बढ़ा और उसकी ऊंचाई सामान्य से ज्यादा तेजी से घटने लगी। अक्टूबर के आखिर तक इसकी स्थिति इतनी खराब हो गई कि यह स्थिर रहकर वैज्ञानिक अवलोकन करने में सक्षम नहीं रहा। इसके बाद नासा ने इसके सभी तंत्र बंद कर दिए।

 

ब्रह्मांड के हजारों रहस्यों से उठाया पर्दा
स्विफ्ट टेलीस्कोप को 20 नवंबर 2004 को अंतरिक्ष में भेजा गया था। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रह्मांड में होने वाले सबसे शक्तिशाली विस्फोटों, खासकर गामा किरण विस्फोटों और सुपरनोवा का अध्ययन करना था। इसकी खासियत यह थी कि किसी भी विस्फोट या असाधारण खगोलीय घटना का संकेत मिलते ही यह तेजी से अपनी दिशा बदलकर उस ओर मुड़ जाता था। अपने 22 साल के अभियान में इसने 2,000 से अधिक गामा किरण विस्फोटों और करीब 1,400 तारों के विस्फोटों का पता लगाया। इसके अलावा धूमकेतुओं, क्षुद्रग्रहों और ब्लैक होल से जुड़ी कई घटनाओं का भी अध्ययन किया।

 

स्विफ्ट को अंतरिक्ष में एक तरह का प्रथम प्रतिक्रिया तंत्र माना जाता था। यह किसी असाधारण खगोलीय घटना का संकेत मिलने पर हबल और जेम्स वेब जैसे दूरबीनों को सूचना देता था, ताकि वे उस घटना का अधिक गहराई से अध्ययन कर सकें। अब वैज्ञानिक इसके विकल्प और भविष्य के अभियानों में इस कमी को पूरा करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं। पेनसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी के खगोलविद जॉन नॉसेक ने कहा कि वैज्ञानिकों को पहले से पता था कि एक दिन स्विफ्ट का सफर समाप्त होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मिशन से मिली सीख भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों में ब्रह्मांड की नई खोजों को तेज करने में मदद करेगी। 

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