Edited By Parveen Kumar,Updated: 12 Apr, 2026 06:03 PM

अपना घर खरीदना हर व्यक्ति का सपना होता है, लेकिन रियल एस्टेट कंपनियों के दिवालिया होने की खबरें अक्सर इस सपने को चिंता में बदल देती हैं। अब इस मुद्दे पर बड़ा फैसला देते हुए National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी...
नेशनल डेस्क : अपना घर खरीदना हर व्यक्ति का सपना होता है, लेकिन रियल एस्टेट कंपनियों के दिवालिया होने की खबरें अक्सर इस सपने को चिंता में बदल देती हैं। अब इस मुद्दे पर बड़ा फैसला देते हुए National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।
अपीलीय न्यायाधिकरण ने अपने हालिया आदेश में कहा है कि दिवालिया प्रक्रिया (Insolvency) केवल उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी, जिसमें डिफॉल्ट हुआ है। इसका मतलब है कि किसी एक प्रोजेक्ट की समस्या का असर कंपनी के बाकी सुरक्षित प्रोजेक्ट्स पर नहीं पड़ेगा।
सिर्फ डिफॉल्ट प्रोजेक्ट पर ही कार्रवाई
NCLAT ने स्पष्ट किया कि किसी एक प्रोजेक्ट में हुई गड़बड़ी की सजा पूरे रियल एस्टेट ग्रुप और अन्य प्रोजेक्ट्स के खरीदारों को नहीं दी जा सकती। ट्रिब्यूनल के अनुसार, अगर किसी प्रोजेक्ट के खिलाफ ‘कॉर्पोरेट इनसॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस’ (CIRP) शुरू होती है, तो यह प्रक्रिया केवल उसी प्रोजेक्ट तक सीमित रहेगी। दो सदस्यीय पीठ, जिसमें अशोक भूषण और बरुण मित्रा शामिल थे, ने कहा कि असंबद्ध प्रोजेक्ट्स को इसमें शामिल करना हितधारकों के हित में नहीं है।
राहेजा डेवलपर्स केस से बनी नजीर
यह अहम फैसला Raheja Developers से जुड़े मामले में आया। दरअसल, National Company Law Tribunal (NCLT) की नई दिल्ली बेंच ने ‘राहेजा कृष्णा हाउसिंग स्कीम’ से जुड़े खरीदारों की याचिका स्वीकार कर ली थी, जिसके खिलाफ अपील की गई थी। अब NCLAT ने साफ कर दिया है कि दिवालिया प्रक्रिया पूरे ग्रुप पर नहीं, बल्कि केवल ‘कृष्णा हाउसिंग स्कीम’ प्रोजेक्ट तक ही लागू होगी। इससे पहले भी ‘राहेजा शिलास’ प्रोजेक्ट के मामले में ट्रिब्यूनल इसी तरह का फैसला दे चुका है।
क्या था बिल्डर का पक्ष?
‘कृष्णा हाउसिंग स्कीम’ एक अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट है, जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाभ मिला है। सुनवाई के दौरान बिल्डर ने तर्क दिया कि COVID-19 महामारी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हुआ, जिससे लागत 183.36 करोड़ रुपये से बढ़कर 204 करोड़ रुपये हो गई और समय पर कब्जा देना संभव नहीं हो सका।
घर खरीदारों के लिए क्या निर्देश?
ट्रिब्यूनल ने समाधान पेशेवर (Resolution Professional) को निर्देश दिया है कि वे ‘फॉर्म-ए’ में जारी विज्ञापन में संशोधन (corrigendum) जारी करें। इसके तहत प्रभावित खरीदारों और लेनदारों को 14 दिनों के भीतर अपने दावे जमा करने होंगे।