Take-home Salary: 1 अप्रैल से बदल जाएगी आपकी pay slip: लागू होने जा रहा नया नियम

Edited By Updated: 01 Apr, 2026 03:52 PM

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नेशनल डेस्क: आज से नए वित्त वर्ष 2026-27 का आगाज हो रहा है और इसके साथ ही नौकरीपेशा लोगों के लिए सैलरी से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव प्रभावी होने जा रहा है। सरकार द्वारा 'नया आयकर अधिनियम 2025' और 'नया लेबर कोड' लागू किए जाने से निजी क्षेत्र में...

नेशनल डेस्क: आज से नए वित्त वर्ष 2026-27 का आगाज हो रहा है और इसके साथ ही नौकरीपेशा लोगों के लिए सैलरी से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव प्रभावी होने जा रहा है। सरकार द्वारा 'New Income Tax Act 2025' और 'new labor code' लागू किए जाने से निजी क्षेत्र में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों के वेतन ढांचे (Salary Structure) में फेरबदल होना तय है। इसका सीधा असर आपकी इन-हैंड सैलरी, पीएफ योगदान और टैक्स देनदारी पर पड़ेगा।

क्या है 50% का नया गणित?
नए नियमों का सबसे मुख्य बिंदु यह है कि अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) उसके कुल वेतन (CTC) के कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए। वर्तमान में बहुत सी कंपनियां टैक्स बचाने के उद्देश्य से बेसिक सैलरी को काफी कम (जैसे 20% या 25%) रखती हैं और बाकी हिस्से को अन्य भत्तों (Allowances) जैसे HRA या ट्रैवल अलाउंस में बांट देती हैं। 1 अप्रैल से कंपनियां भत्तों को कुल सैलरी के 50% से ज्यादा नहीं रख पाएंगी।

पीएफ बढ़ेगा, रिटायरमेंट होगा सुरक्षित
चूंकि भविष्य निधि (PF) और ग्रैच्युटी की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर की जाती है, इसलिए बेसिक पे बढ़ते ही आपके पीएफ खाते में कटने वाली राशि भी बढ़ जाएगी। इसका सकारात्मक पहलू यह है कि आपका रिटायरमेंट फंड पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से जमा होगा, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि पीएफ कंट्रीब्यूशन बढ़ने से हर महीने घर ले जाने वाली सैलरी (Take-home Salary) में कुछ कमी आ सकती है। हालांकि, जिन कर्मचारियों की बेसिक पे पहले से ही 50% या उससे अधिक है, उनके वेतन पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा।

टैक्स की गणना पर पड़ेगा असर
सैलरी स्ट्रक्चर बदलने से टैक्स के मोर्चे पर भी बदलाव दिखेंगे। पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनने वालों के लिए बेसिक सैलरी बढ़ने से HRA पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा कम हो सकता है, क्योंकि इसकी गणना मूल वेतन के आधार पर होती है। ऐसे में जो लोग मेट्रो शहरों में रहते हैं या होम लोन चुका रहे हैं, उन्हें 80C और NPS जैसे निवेश विकल्पों का सहारा लेना पड़ सकता है।

नए टैक्स रिजीम वालों को बड़ी राहत
दूसरी ओर, जो लोग नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) अपना चुके हैं, उन्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। नए आयकर अधिनियम के तहत अब ₹12.75 लाख तक की सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं देना होगा (जिसमें ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन शामिल है)। चूंकि नए रिजीम में भत्तों पर कोई छूट नहीं मिलती, इसलिए बेसिक सैलरी के बढ़ने या घटने का टैक्स की देनदारी पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।

 

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