Edited By Rohini Oberoi,Updated: 06 Apr, 2026 11:44 AM

प्राइवेट और सरकारी संस्थानों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार एक ऐसी खुशखबरी लेकर आई है जो सीधे उनकी जेब पर असर डालेगी। अक्सर काम के दबाव के कारण कर्मचारी अपनी पूरी छुट्टियां नहीं ले पाते और साल के अंत में वे 'लैप्स' (खत्म)...
New Labour Codes 2026 : प्राइवेट और सरकारी संस्थानों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए केंद्र सरकार एक ऐसी खुशखबरी लेकर आई है जो सीधे उनकी जेब पर असर डालेगी। अक्सर काम के दबाव के कारण कर्मचारी अपनी पूरी छुट्टियां नहीं ले पाते और साल के अंत में वे 'लैप्स' (खत्म) हो जाती हैं लेकिन नए लेबर कोड के तहत अब कर्मचारियों को उनकी बची हुई छुट्टियों के बदले हर साल नकद पैसा (Cash) मिलेगा।
क्या है नया 'लीव एनकैशमेंट' नियम?
पुराने नियमों के मुताबिक कर्मचारी अपनी बची हुई छुट्टियों का पैसा आमतौर पर रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने के समय ही निकाल सकते थे लेकिन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH) कोड, 2020 के तहत इसमें बड़े बदलाव किए गए हैं:
30 दिन की लिमिट: एक कर्मचारी साल के अंत में अधिकतम 30 दिन की अर्जित छुट्टियां (Earned Leave) ही अगले साल के लिए बचा (Carry Forward) कर रख सकेगा।
अतिरिक्त छुट्टियों का कैश: यदि आपके पास 30 दिन से ज्यादा छुट्टियां बची हैं तो कंपनी को उन अतिरिक्त दिनों का पैसा उसी साल कर्मचारी को देना होगा।
उदाहरण के लिए: अगर साल के अंत में आपकी 45 छुट्टियां बची हैं तो 30 छुट्टियां अगले साल के खाते में जुड़ जाएंगी और बाकी 15 दिनों की सैलरी आपको नकद मिल जाएगी।
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अब 180 दिन काम करते ही मिलेगी छुट्टी
नए लेबर कोड में छुट्टियों की पात्रता (Eligibility) को भी आसान बना दिया गया है। पहले 'अर्न लीव' का हकदार बनने के लिए कर्मचारी को साल में कम से कम 240 दिन काम करना अनिवार्य था जिसे अब घटाकर 180 दिन कर दिया गया है। यानी अब आप साल के 6 महीने पूरे करते ही छुट्टियां कमाने और उन्हें कैश कराने के हकदार बन जाएंगे।
नौकरी छोड़ने पर 48 घंटे में होगा फुल एंड फाइनल
नए नियमों में कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए एक और बड़ा प्रावधान है। यदि कोई कर्मचारी इस्तीफा देता है या उसे नौकरी से निकाला जाता है तो कंपनी को उसका सारा बकाया और हिसाब-किताब (Full & Final Settlement) अधिकतम 2 दिन (48 घंटे) के भीतर निपटाना होगा। पहले इस प्रक्रिया में हफ्तों या महीनों लग जाते थे।

अगर बॉस ने छुट्टी देने से मना किया तो?
नियम यह भी कहता है कि अगर कर्मचारी ने समय पर छुट्टी मांगी और मैनेजमेंट या बॉस ने उसे देने से इनकार कर दिया तो वह छुट्टी '30 दिन की लिमिट' वाले कोटे में नहीं गिनी जाएगी। उसे अलग से संचित (Accumulate) किया जाएगा ताकि कर्मचारी का नुकसान न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से न केवल कर्मचारियों की 'टेक-होम सैलरी' में इजाफा होगा बल्कि कंपनियों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।