Gold Price New Rules: सोना खरीदने वालों को बड़ा झटका! बदल गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड के नियम, अब देना होगा टैक्स

Edited By Updated: 02 Apr, 2026 03:16 PM

sovereign gold bond rules have changed now tax will have to be paid

देश में 1 अप्रैल से कई सारे नए रुल्स लागू हो गए हैं। 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष के साथ सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) पर मिलने वाली टैक्स छूट के नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब तक मैच्योरिटी तक बॉन्ड रखने पर...

नेशनल डेस्क: देश में 1 अप्रैल से कई सारे नए रुल्स लागू हो गए हैं। 1 अप्रैल 2026 से शुरू हुए नए वित्तीय वर्ष के साथ सरकार ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (Sovereign Gold Bond) पर मिलने वाली टैक्स छूट के नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब तक मैच्योरिटी तक बॉन्ड रखने पर मिलने वाला मुनाफा टैक्स-फ्री होता था, लेकिन अब कुछ खास परिस्थितियों में निवेशकों को अपनी कमाई पर टैक्स देना होगा।

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क्या है नया टैक्स नियम?

नए नियमों के अनुसार, अब SGB पर मिलने वाली टैक्स छूट इस बात पर निर्भर करेगी कि आपने बॉन्ड कहाँ से खरीदा है:

  • सेकेंडरी मार्केट (शेयर बाजार) से खरीदारी: यदि आपने SGB को सीधे सरकार से न खरीदकर शेयर बाजार या किसी अन्य निवेशक से खरीदा है, तो अब मैच्योरिटी पर होने वाले मुनाफे पर आपको टैक्स देना होगा।
  • प्राइमरी इश्यू (सीधे खरीद) पर राहत: जिन निवेशकों ने बॉन्ड को सीधे सरकार/RBI से इश्यू के समय खरीदा है और उसे 8 साल की मैच्योरिटी तक अपने पास रखा है, उनके लिए पुराना नियम लागू रहेगा और उन्हें टैक्स में छूट मिलती रहेगी।

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कितना लगेगा टैक्स?

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर अब गोल्ड ETF की तर्ज पर ही कैपिटल गेन टैक्स लगेगा:

  1. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG): यदि आप निवेश के 3 साल के भीतर बॉन्ड बेचते हैं, तो होने वाला लाभ आपकी सालाना आय में जोड़ दिया जाएगा। इस पर आपके मौजूदा इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा।
  2. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG): यदि आप निवेश को 3 साल से अधिक समय तक रखते हैं, तो मुनाफे पर 20% (इंडेक्सेशन लाभ के साथ) या सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के आधार पर टैक्स देय होगा।

निवेशकों के लिए जरूरी सुझाव

बदलते नियमों के बीच अपने रिटर्न को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:

  • अगर आपका उद्देश्य टैक्स बचाना है, तो हमेशा RBI द्वारा जारी किए जाने वाले फ्रेश (Primary) इश्यू के दौरान ही SGB खरीदें।
  • अब शेयर बाजार (Stock Exchange) से पुराने बॉन्ड खरीदते समय टैक्स कटौती को ध्यान में रखकर ही संभावित मुनाफे का आकलन करें।

 

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