Edited By Sahil Kumar,Updated: 19 Jan, 2026 03:07 PM

दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका देते हुए उनकी सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए सजा पर...
नेशनल डेस्कः दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में दोषी ठहराए गए पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को बड़ा झटका देते हुए उनकी सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता और अपराध की प्रकृति को देखते हुए सजा पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं बनता। न्यायमूर्ति की पीठ ने सेंगर द्वारा दाखिल उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को निलंबित करने और अपील के दौरान जमानत दिए जाने की मांग की थी। अदालत ने कहा कि हिरासत में हुई मौत जैसे गंभीर अपराध में दोषी को राहत देना न्यायहित में नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला
यह मामला उन्नाव जिले में वर्ष 2017 में हुई कस्टोडियल डेथ से जुड़ा है। पीड़ित को पुलिस हिरासत में कथित तौर पर बुरी तरह पीटा गया था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। जांच में सामने आया कि इस पूरे घटनाक्रम में कुलदीप सिंह सेंगर की अहम भूमिका थी और उन्होंने अपने प्रभाव का दुरुपयोग किया। मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच पूरी होने के बाद विशेष अदालत ने सेंगर को दोषी ठहराते हुए उन्हें सजा सुनाई थी। अदालत ने माना था कि यह हत्या सुनियोजित थी और इसमें सत्ता और प्रभाव का गलत इस्तेमाल किया गया।
हाईकोर्ट की टिप्पणी
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सेंगर एक प्रभावशाली व्यक्ति रहे हैं और यदि उन्हें राहत दी जाती है तो इससे न्याय प्रक्रिया और पीड़ित पक्ष पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि कस्टोडियल डेथ लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है और ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।