दिल्ली हाईकोर्ट से युवा कांग्रेस अध्यक्ष उदय भानु चिब को राहत, जमानत पर रोक हटने से रिहाई का रास्ता साफ

Edited By Updated: 02 Mar, 2026 08:34 PM

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भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है।

नेशनल डेस्क: भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय भानु चिब को इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से महत्वपूर्ण राहत मिली है। कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा उनकी जमानत पर लगाई गई रोक को अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है, जिससे उनकी रिहाई का मार्ग साफ हो गया है।

जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सेशंस कोर्ट का आदेश पर्याप्त तर्क के बिना पारित किया गया प्रतीत होता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत पर रोक लगाना केवल असाधारण परिस्थितियों में ही उचित ठहराया जा सकता है।

क्या है पूरा मामला?

भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भारत मंडपम में आयोजित इंडिया AI इम्पैक्ट समिट के दौरान ‘शर्टलेस’ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने टी-शर्ट पर नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरों के साथ नारेबाजी की। पुलिस ने इसे शांति भंग करने की कोशिश बताते हुए चिब को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया।

28 फरवरी 2026 को ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने 50,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। उसी दिन शाम को पुलिस की अपील पर सेशंस कोर्ट ने जमानत आदेश पर रोक लगा दी और अगली सुनवाई 6 मार्च तय की।  2 मार्च 2026 को चिब ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद हाईकोर्ट ने सेशंस कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया।

हाईकोर्ट की टिप्पणी

कोर्ट ने कहा कि जमानत को स्थगित करना सामान्य प्रक्रिया नहीं है और इसे केवल दुर्लभ परिस्थितियों में ही लागू किया जाना चाहिए। आदेश में पर्याप्त न्यायिक विवेक के अभाव की ओर संकेत करते हुए हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप को आवश्यक बताया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की विस्तृत सुनवाई आगे की तारीख पर होगी, लेकिन फिलहाल जमानत पर लगी रोक प्रभावी नहीं रहेगी।

कानूनी और राजनीतिक मायने

यह फैसला जमानत के सिद्धांतों और राजनीतिक विरोध के अधिकार से जुड़े व्यापक मुद्दों को रेखांकित करता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि बिना पर्याप्त आधार के पूर्व-ट्रायल हिरासत को दंडात्मक स्वरूप नहीं दिया जा सकता। अगली सुनवाई 6 मार्च को निर्धारित है, जहां मामले की आगे की दिशा तय होगी।
 

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