Edited By Sahil Kumar,Updated: 06 Mar, 2026 06:55 PM

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की महंगाई का असर भारत में खाने के तेल की कीमतों पर पड़ने लगा है। रुपये की कमजोरी और सप्लाई बाधित होने से सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल के दाम 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। व्यापारियों का कहना है कि अगर...
नेशनल डेस्कः मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध जैसे हालातों का असर अब भारतीय बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका-ईरान और इजराइल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और रुपये की कमजोरी के कारण देश में खाने के तेल के दाम बढ़ने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों में सूरजमुखी, सोयाबीन और पाम तेल की कीमतों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में कीमतें 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकती हैं।
व्यापारियों के मुताबिक वैश्विक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है। इसी वजह से आयातित खाद्य तेल भारत में महंगे पड़ने लगे हैं और इसका सीधा असर घरेलू बाजार में कीमतों पर दिखाई दे रहा है। खासतौर पर सूरजमुखी तेल, सोयाबीन तेल, पाम ऑयल और ब्लेंडेड ऑयल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं।
आयात महंगा पड़ने से बढ़ी चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और रुपये की गिरावट के कारण भारत के लिए खाद्य तेल का आयात महंगा हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसे हालातों के कारण समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ गया है, जिससे फ्रेट चार्ज में भी बढ़ोतरी हुई है। इससे तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
भारत की आयात पर निर्भरता
भारत में खाद्य तेल की मांग बहुत अधिक है, लेकिन घरेलू उत्पादन अभी भी पर्याप्त नहीं है। उदाहरण के तौर पर सूरजमुखी तेल का उत्पादन मुख्य रूप से कर्नाटक में होता है, जबकि महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश भी इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। इसके बावजूद देश की कुल मांग को पूरा करने के लिए भारत को बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ता है। देश में सूरजमुखी तेल समेत कई खाद्य तेल यूक्रेन, रूस, अर्जेंटीना और बुल्गारिया जैसे देशों से आयात किए जाते हैं। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण इन देशों से आने वाली सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
एक हफ्ते में ही बढ़ गए दाम
खुदरा बाजारों में कीमतों में बढ़ोतरी साफ नजर आने लगी है। उदाहरण के तौर पर बेंगलुरु में एक सप्ताह पहले तक सूरजमुखी तेल लगभग 161 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, जो अब बढ़कर करीब 165 रुपये प्रति लीटर हो गया है। यह बढ़ोतरी किसी एक ब्रांड तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग सभी कंपनियों के उत्पादों पर इसका असर पड़ा है। इसके अलावा सूरजमुखी और राइस ब्रान के मिश्रण से बनने वाले ब्लेंडेड तेलों की कीमतें भी बढ़ी हैं। बाजार में लोकप्रिय ब्लेंडेड ऑयल ब्रांडों के दामों में भी तेजी देखी जा रही है।
आगे और बढ़ सकते हैं दाम
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो आने वाले समय में सूरजमुखी तेल और ब्लेंडेड ऑयल की कीमतों में 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में वैश्विक तनाव का असर आने वाले दिनों में आम उपभोक्ताओं की रसोई पर और ज्यादा महसूस किया जा सकता है।