Edited By Pardeep,Updated: 10 Sep, 2026 05:42 AM

पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जम्मू और कश्मीर (IFFJK) के तीसरे दिन का आयोजन शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में हुआ। इस दौरान स्थानीय सिनेमाई प्रतिभाओं को निखारने, अंतरराष्ट्रीय सह-उत्पादन, क्षेत्रीय सिनेमा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस...
श्रीनगर: पहले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव जम्मू और कश्मीर (IFFJK) के तीसरे दिन का आयोजन शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर (SKICC) में हुआ। इस दौरान स्थानीय सिनेमाई प्रतिभाओं को निखारने, अंतरराष्ट्रीय सह-उत्पादन, क्षेत्रीय सिनेमा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और फिल्म निर्माण की बारीकियों पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम में देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं, अभिनेताओं, संपादकों, छात्रों और सिनेमा प्रेमियों ने भाग लिया।
युवाओं और स्थानीय कहानीकारों को सशक्त बनाने पर जोर
महोत्सव में 'इकोज ऑफ द चिनार: एम्पावरिंग J&K’s नेक्स्ट जनरेशन ऑफ स्टोरीटेलर्स' नाम से एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इसमें जम्मू-कश्मीर की युवा प्रतिभाओं, स्थानीय संस्थानों और सिनेमा में राज्य के सही प्रतिनिधित्व पर विचार साझा किए गए। इस सत्र का संचालन दानिश रेंज़ू ने किया, जबकि मुख्य वक्ता फिल्म निर्माता और लेखक राहत शाह काज़मी रहे।
इसके अतिरिक्त 'ग्लोबल पार्टनरशिप्स इन द वैली: को-प्रोड्यूसिंग जम्मू एंड कश्मीरी सिनेमा फॉर द वर्ल्ड' सत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, टिकाऊ वित्तपोषण और फेस्टिवल-मार्केट रणनीतियों के जरिए क्षेत्रीय सिनेमा को वैश्विक मंच पर ले जाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। भारतीय निर्देशक व संपादक रबी रंजन मैत्रा द्वारा संचालित इस सत्र में कपिल मटू, मुंजाल श्रॉफ और सबा भट शामिल रहे। वक्ताओं ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में कहानियों और प्रतिभाओं का अटूट खजाना है, जिसे सही दिशा और प्रशिक्षण देकर निखारने की जरूरत है।
सिनेमा में AI तकनीक और क्षेत्रीय फिल्मों का भविष्य
'द जेंटल ट्रुथ: AI एंड द ब्यूटीफुल सोल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में डॉक्यूमेंट्री फिल्मों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग, नैतिकता और इसके प्रभाव का आकलन किया गया। संस्कार देसाई के संचालन में हुए इस सत्र में सुब्बिया नल्लामुथु, अरुण चड्ढा, यदु विजयकृष्णन, सुप्रियो सेन और राजा शब्बीर खान ने विचार रखे।
वहीं 'लोकल वॉइसेज, ग्लोबल हार्ट्स: सेलिब्रेटिंग रीजनल सिनेमा इन द वैली' सत्र का संचालन अरफी लांबा ने किया, जिसमें त्रिबेनी राय, डॉ. प्रदीप केंचनूरु, हाओबाम पबन कुमार और माधवी तंगेला ने क्षेत्रीय कहानियों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के तरीकों पर बात की।
मास्टरक्लास: एडिटिंग और अभिनय की बारीकियां सीखीं
महोत्सव के दौरान तकनीकी व रचनात्मक पहलुओं पर मास्टरक्लास भी आयोजित की गईं।
- फिल्म एडिटिंग: 'कटिंग विजुअल्स, ओर कटिंग इमोशंस' मास्टरक्लास में रबी रंजन मैत्रा ने फिल्म संपादन की लय, विजुअल कंटिन्यूटी और कट्स के भावनात्मक प्रभाव के बारे में बताया।
- अभिनय कला: 'बियॉन्ड द स्टेज: इनसाइड द एक्टर्स क्राफ्ट' सत्र में प्रसिद्ध अभिनेता व निर्देशक चित्तरंजन त्रिपाठी ने रंगमंचीय प्रशिक्षण और कैमरे के सामने अभिनय के बदलते आयामों पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अंत में छात्रों और युवा सिनेमा प्रेमियों ने वक्ताओं से सवाल-जवाब कर फिल्म उद्योग में उभरते अवसरों की जानकारी प्राप्त की। यह महोत्सव जम्मू-कश्मीर को स्थानीय कहानी कला के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।