दो हजार से अधिक अतिरिक्त एआई-सक्षम कैमरे लगाने की योजना; निगरानी नेटवर्क 2,130 से बढ़कर लगभग 4,200 तक पहुंचेगा

Edited By Updated: 26 Aug, 2026 07:27 PM

plan to install over 2 000 additional ai enabled cameras

चंडीगढ़ पुलिसिंग के क्षेत्र में एक बड़े तकनीकी उन्नयन के लिए तैयार है, जिसके तहत शहर भर में 2,000 से अधिक अतिरिक्त एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। इससे मौजूदा नेटवर्क 2,130 से लगभग दोगुना होकर करीब 4,200 कैमरों तक पहुंच जाएगा और केंद्र...

चंडीगढ़ : चंडीगढ़ पुलिसिंग के क्षेत्र में एक बड़े तकनीकी उन्नयन के लिए तैयार है, जिसके तहत शहर भर में 2,000 से अधिक अतिरिक्त एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना है। इससे मौजूदा नेटवर्क 2,130 से लगभग दोगुना होकर करीब 4,200 कैमरों तक पहुंच जाएगा और केंद्र शासित प्रदेश भर में निगरानी का दायरा काफी हद तक बढ़ जाएगा।

विस्तारित नेटवर्क शेष 68 एटीसी स्थानों को कवर करेगा और इसमें प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स तथा वाहनों व व्यक्तियों की स्वचालित पहचान जैसी उन्नत क्षमताओं को शामिल करने का प्रस्ताव है, जिससे चंडीगढ़ पुलिस को निवारक पुलिसिंग, यातायात प्रबंधन और तेज प्रतिक्रिया के लिए और मजबूत साधन मिलेंगे।

इस रोडमैप पर बुधवार को पुलिस मुख्यालय, सेक्टर 9, चंडीगढ़ में राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू की अध्यक्षता में आयोजित यूटी सलाहकार स्थायी समिति (कानून एवं व्यवस्था) की बैठक में चर्चा की गई। बैठक में चंडीगढ़ ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, कुलदीप कुमार, चंडीगढ़ के पूर्व मेयर और मनमोहन सिंह, होटल एंड रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन, कंवरदीप कौर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), चंडीगढ़, अनुराग दरू, पुलिस अधीक्षक तथा पांच डिवीजनों के उप-मंडल पुलिस अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

समिति ने अपनी पिछली बैठक की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) की समीक्षा की और तकनीक, डेटा-आधारित पुलिसिंग, क्षमता निर्माण तथा सामाजिक हस्तक्षेपों के माध्यम से चंडीगढ़ के सार्वजनिक सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।

प्रस्तावित निगरानी उन्नयन का स्वागत करते हुए संधू ने कहा कि चंडीगढ़ में स्मार्ट, सुरक्षित और नागरिक-केंद्रित शहरी पुलिसिंग का राष्ट्रीय मॉडल बनने की क्षमता है। संधू ने कहा, “उद्देश्य केवल कैमरे बढ़ाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। एआई, प्रिडिक्टिव टूल्स और रीयल-टाइम डेटा से अपराध रोकने, प्रतिक्रिया समय बेहतर करने और नागरिकों को अधिक सुरक्षित महसूस कराने में मदद मिलनी चाहिए। चंडीगढ़ के पास राष्ट्रीय मानक स्थापित करने का पैमाना और संस्थागत मजबूती दोनों हैं।”

पंजाब यूनिवर्सिटी के सहयोग से पुलिसिंग में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का प्रस्ताव

समिति ने चंडीगढ़ में पुलिसिंग एवं सुरक्षा प्रथाओं के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की अपनी पूर्व सिफारिश को दोहराया और प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने का आह्वान किया। चंडीगढ़ पुलिस ने समिति को आश्वासन दिया कि इस दिशा में काम किया जाएगा। संधू ने सुझाव दिया कि इस केंद्र को पंजाब यूनिवर्सिटी के सहयोग से स्थापित करने की संभावना तलाशी जाए, ताकि एआई-सक्षम पुलिसिंग, साइबर अपराध, व्यवहारगत अध्ययन, फोरेंसिक एवं कानूनी शोध, यातायात प्रबंधन और उभरती सुरक्षा चुनौतियों के क्षेत्र में शोध व नवाचार के लिए पुलिस के अनुभव और शैक्षणिक विशेषज्ञता को एक साथ लाया जा सके।

समिति ने पुलिस-अकादमिक संपर्क को मजबूत करने के लिए कानून तथा अन्य संबंधित विषयों के विद्यार्थियों हेतु संरचित इंटर्नशिप और शोध अवसरों का भी प्रस्ताव रखा। निवारक पुलिसिंग के तहत समिति को एसएसपी चंडीगढ़ ने बताया कि 600 से अधिक व्यक्ति तीन से अधिक बार आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं, जबकि एक व्यापक डेटाबेस में 8,000 से अधिक ऐसे व्यक्ति शामिल हैं जो एक या एक से अधिक आपराधिक मामलों में संलिप्त रहे हैं। समिति ने सुझाव दिया कि प्रवर्तन के साथ-साथ इस डेटा की सामाजिक और व्यवहारगत दृष्टिकोण से भी जांच की जानी चाहिए। संधू ने आपराधिक संलिप्तता और बार-बार अपराध करने के पीछे के सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक तथा अन्य कारकों को समझने के लिए शैक्षणिक एवं सामाजिक-विज्ञान विशेषज्ञता के साथ एक संरचित अध्ययन का प्रस्ताव रखा।

ये निष्कर्ष कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े लक्षित हस्तक्षेप तैयार करने में मदद कर सकते हैं, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जिन्हें सफलतापूर्वक मुख्यधारा में वापस लाया जा सकता है।

समिति ने आव्रजन (इमिग्रेशन) से जुड़ी धोखाधड़ी के विरुद्ध किए गए उपायों की भी समीक्षा की और विद्यार्थियों, युवाओं तथा परिवारों के लिए और मजबूत सुरक्षा उपायों पर जोर दिया। समिति को बताया गया कि तैयार किए जा रहे नए एसओपी/नियामक ढांचे के तहत निगरानी के दायरे को व्यापक करते हुए संचालकों की मौजूदा श्रेणियों के अलावा स्टडी कंसल्टेंट्स और अन्य कंसल्टेंट्स को भी इसमें शामिल करने का प्रस्ताव है। ऐसे संचालकों को निर्धारित अनुमति या प्राधिकरण लेना अनिवार्य होगा और वे एक संरचित निगरानी तंत्र के दायरे में आएंगे।

संधू ने कहा कि उद्देश्य एक पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाना होना चाहिए, जो नागरिकों को धोखाधड़ी करने वाले संचालकों से सुरक्षित रखे और साथ ही वैध कंसल्टेंट्स को स्पष्ट रूप से परिभाषित नियामक ढांचे के भीतर काम करने की अनुमति दे।

समिति की बैठक में सड़क सुरक्षा को केंद्रित हस्तक्षेप के लिए एक अन्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया। दुर्घटनाओं और मौतों के रुझानों का संज्ञान लेते हुए समिति ने दुर्घटना-संभावित मार्गों, कारणों और पैटर्न के विस्तृत विश्लेषण का आह्वान किया, जिसके बाद तकनीक, प्रवर्तन और सड़क-इंजीनियरिंग समाधानों की लक्षित तैनाती की जाए। संधू ने कहा कि चंडीगढ़ को सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में मापने योग्य कमी लाने की दिशा में काम करना चाहिए और उन्होंने अगली बैठक में इसकी विस्तृत समीक्षा की मांग की।

एसएसपी ने समिति को बताया कि 2025 से अब तक विभिन्न आउटरीच मंचों के माध्यम से साइबर अपराध जागरूकता के 553 सत्र आयोजित किए जा चुके हैं। समिति ने उभरती ऑनलाइन धोखाधड़ी और धमकी भरे ईमेल से निपटने के लिए साइबर-प्रतिक्रिया क्षमताओं को और मजबूत करने का आह्वान किया। यह भी बताया गया कि स्कूलों को मिलने वाली धमकियों से निपटने के लिए एक एसओपी तैयार कर ली गई है।

समिति ने रेखांकित किया कि महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थियों और व्यापारियों की सुरक्षा एक प्रमुख प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए, जिसे तकनीक, निवारक खुफिया जानकारी, प्रभावी गश्त और उत्तरदायी पुलिसिंग का सहयोग प्राप्त हो। एसएसपी ने यह भी बताया कि अंतरराज्यीय अपराध से निपटने के लिए नियमित ट्राईसिटी समन्वय बैठकों के माध्यम से चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के बीच समन्वय को मजबूत किया गया है।

नशा नियंत्रण के संबंध में समिति को बताया गया कि चंडीगढ़ पुलिस नशा तस्करी के विरुद्ध अपनी जीरो-टॉलरेंस नीति जारी रखे हुए है, जिसमें प्रवर्तन के साथ-साथ जागरूकता पहलें भी चलाई जा रही हैं।

समिति ने कमजोर वर्ग के किशोरों और भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के प्रति अधिक संरचित दृष्टिकोण अपनाने की भी मांग की। इसने सुझाव दिया कि पुलिस, महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभागों को शैक्षणिक एवं सामाजिक क्षेत्र की विशेषज्ञता के साथ एक मंच पर लाया जाए, ताकि डेटा-आधारित पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल करने वाले हस्तक्षेप विकसित किए जा सकें।

समिति ने अवैध रूप से संचालित प्रतिष्ठानों और अनधिकृत विक्रेताओं की व्यवस्थित मैपिंग तथा उनके विरुद्ध समुचित नियामक कार्रवाई का भी आह्वान किया, जिसमें पारदर्शी, एकसमान और डेटा-आधारित प्रवर्तन पर जोर दिया गया।

बैठक के समापन पर संधू ने निवारक पुलिसिंग, नशा-विरोधी प्रवर्तन, तकनीक-आधारित यातायात प्रबंधन और हाल की कानून-व्यवस्था संबंधी स्थितियों से पेशेवर तरीके से निपटने के लिए चंडीगढ़ पुलिस के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब ध्यान मौजूदा मजबूतियों पर आगे निर्माण करने तथा एआई, तकनीक, शोध, प्रशिक्षित जनशक्ति और सामाजिक हस्तक्षेपों का उपयोग करते हुए चंडीगढ़ के पुलिसिंग मानकों को अगले स्तर तक ले जाने पर होना चाहिए।

संधू ने कहा, “चंडीगढ़ के पास ऐसा पुलिसिंग मॉडल विकसित करने का अवसर है जहां तकनीक रोकथाम को मजबूत करे, डेटा निर्णयों का मार्गदर्शन करे और सामाजिक हस्तक्षेप प्रवर्तन का पूरक बने। लक्ष्य सरल होना चाहिए- एक अधिक सुरक्षित चंडीगढ़ और ऐसा पुलिसिंग मॉडल जो देश के लिए मानक स्थापित कर सके।”
 

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