Edited By Pardeep,Updated: 15 Jul, 2020 03:56 AM

गलवान व अन्य क्षेत्रों में बिना सैनिकों की संख्या कम किए व एल.ए.सी. पर सख्ती के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रियों और भाजपा के पदाधिकारियों को संकेत दिया है कि वे कम से कम चीन के खिलाफ बयानबाजी करें। भगवा पार्टी के साथ जुड़े संगठनों और...
नई दिल्लीः गलवान व अन्य क्षेत्रों में बिना सैनिकों की संख्या कम किए व एल.ए.सी. पर सख्ती के बाद अब प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रियों और भाजपा के पदाधिकारियों को संकेत दिया है कि वे कम से कम चीन के खिलाफ बयानबाजी करें। भगवा पार्टी के साथ जुड़े संगठनों और व्यापार निकायों को भी उनके चीन विरोधी बयानबाजी पर लगाम लगाने के लिए अवगत कराया है। वहीं याद रहे कि भारत के चीन से व्यापार के मुद्दों पर रोक लगाने की 7 जुलाई की घोषणा के बाद से किसी भी मंत्री ने एक शब्द नहीं बोला, क्योंकि सरकार लोगों को रोक रही है।

चीनी विदेश मंत्री वांग ली ने 7 जुलाई की शांति के संदर्भ मेें कहा था कि हमें उम्मीद है कि भारत चीन के साथ लोगों की राय के अनुसार सही दिशा में काम करेगा। मतभेदों और जटिल मामलों को बढ़ाने से बचें ताकि संयुक्त रूप से भारत-चीन संबंधों की तस्वीर को बरकरार रखा जा सके। जाहिर है कि चीन चाहता है कि भारत अपनी जनता का मार्गदर्शन करे और चीन विरोधी बयानबाजी को बंद करे और पूर्ण सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए किसी भी विभाग, राज्यों और कंपनियों द्वारा उठाए गए सभी चीन विरोधी कदमों को वापस ले। यही कारण है कि चीनी सामानों का बहिष्कार अचानक शांत हो गया है। वहीं आधिकारिक तौर पर 59 चीनी एप्स की स्थिति बहाल करने के लिए 59 में से कुछ के प्रमोटरों के साथ योग्य सूत्र कार्य कर रहे हैं।

इसी संदर्भ में टिकटॉक की मालिक बाइटडांस कंपनी अपने परिचालन के साथ-साथ अपने मुख्यालय को चीन से बाहर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही है। इसका मतलब है कि भारत की डेटा सुरक्षा चिंताओं को लेकर कार्य किया जाएगा, इसके लिए सर्वर भारत में स्थानांतरित किए जाएंगे। सरकार के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि 59 एप प्रतिबंधों को छोड़कर, किसी भी चीनी कंपनी के खिलाफ किसी भी मंत्रालय और विभागों द्वारा अभी तक कोई ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। यहां तक कि किसी भी एजैंसी द्वारा अनुबंधों को रद्द करना तकनीकी आधार पर था न कि उनके चीनी मूल के कारण।