Central Vista Project Name Changes: अब PMO नहीं, 'सेवा तीर्थ' कहिए! मोदी सरकार ने बदल दी प्रधानमंत्री कार्यालय की पहचान

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 04:10 PM

pmo renamed as seva teerth in central vista

पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की पहचान को स्वदेशी रंग में रंगने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत निर्मित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और प्रशासनिक ब्लॉक के नए परिसर का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया...

नेशनल डेस्क: पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश की पहचान को स्वदेशी रंग में रंगने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। हाल ही में सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत निर्मित PMOऔर प्रशासनिक ब्लॉक के नए परिसर का नाम ‘सेवा तीर्थ’ रखा गया है। पहले इसे 'एग्जीक्यूटिव एनक्लेव' कहा जाता था। सरकार का मानना है कि यह नाम शासन में 'सेवा की भावना' को सर्वोपरि रखने का प्रतीक है।

प्रमुख बदलाव

पिछले कुछ वर्षों में हुए नाम परिवर्तन की सूची लंबी है, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति और लोक-कल्याण को प्राथमिकता देना है:

  • सत्ता से सेवा तक: राजपथ का नाम बदलकर 'कर्तव्य पथ' किया गया, वहीं पीएम आवास 7 रेस कोर्स रोड अब 'लोक कल्याण मार्ग' कहलाएगा।
  • प्रशासनिक परिवर्तन: योजना आयोग अब 'नीति आयोग' है और केंद्रीय सचिवालय के नए भवनों को 'कर्तव्य भवन' नाम दिया गया है।
  •  इतिहास का सम्मान: डलहौजी रोड का नाम मुगल राजकुमार दारा शिकोह के नाम पर रखा गया, जो सांस्कृतिक एकता के प्रतीक थे।
  • राजभवन से लोकभवन: कई राज्यों में राज्यपाल के आवास को अब 'लोकभवन' या 'लोक निवास' कहा जाने लगा है।

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शहरों और कानूनों का नया स्वरूप

इलाहाबाद का प्रयागराज और फैजाबाद का अयोध्या बनना धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान की वापसी मानी गई। वहीं महाराष्ट्र में औरंगाबाद अब छत्रपति संभाजीनगर और उस्मानाबाद धाराशिव के नाम से जाना जाता है। सिर्फ स्थान ही नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव आया है। 1 जुलाई 2024 से ब्रिटिशकालीन IPC (भारतीय दंड संहिता) की जगह 'भारतीय न्याय संहिता' (BNS) लागू हो गई है, जिसे Indian environment के अनुरूप तैयार किया गया है।

नाम बदलने के पीछे सरकार के 3 बड़े तर्क:

  • De-colonization: ब्रिटिश शासन के प्रतीकों को हटाकर राष्ट्रीय गौरव को स्थापित करना।
  • सांस्कृतिक पुनरुत्थान: भारतीय महापुरुषों, संस्कृति और वीरता की कहानियों को सार्वजनिक स्थानों के नाम से जोड़ना।
  • सेवा का संकल्प: 'राज' (शासन) की जगह 'लोक' (जनता) और 'सेवा' शब्द को महत्व देना।

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