Edited By Mehak,Updated: 06 Mar, 2026 03:32 PM

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम बेहद असामान्य हैं और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी को ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया। बदलती भू-राजनीति...
नेशनल डेस्क : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष का जिक्र करते हुए शुक्रवार को कहा कि बदलती भू-राजनीति के इस दौर में महासागर एक बार फिर दुनिया के शक्ति संतुलन के केंद्र में आ गए हैं और भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास एवं क्षमता के साथ नेतृत्व प्रदान करे। सिंह ने यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम ''बेहद असामान्य'' हैं और क्षेत्र की स्थिति का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा, ''पश्चिम एशिया में जो हो रहा है, वह बेहद असामान्य है। इस समय इस पर कोई ठोस टिप्पणी करना कठिन है कि पश्चिम एशिया में परिस्थितियां आगे किस दिशा में जाएंगी।'' उन्होंने कहा, ''यदि हम होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी के पूरे क्षेत्र को देखें तो यह दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्र है। जब इस क्षेत्र में अशांति या व्यवधान होता है तो इसका सीधा असर तेल और गैस की आपूर्ति पर पड़ता है।'' उन्होंने कहा, ''आज हम केवल ऊर्जा क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रों में भी आपूर्ति शृंखला में व्यवधान देख रहे हैं।

इन अनिश्चितताओं का सीधा प्रभाव अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार पर पड़ता है।'' सिंह ने कहा कि मौजूदा स्थिति ने महासागरों के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया है। उन्होंने कहा, ''बदलती वैश्विक भू-राजनीति के इस दौर में महासागर एक बार फिर दुनिया के शक्ति संतुलन के केंद्र में आ गए हैं। ऐसे समय में एक प्रमुख समुद्री राष्ट्र के रूप में भारत की जिम्मेदारी है कि वह आत्मविश्वास, क्षमता और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ नेतृत्व प्रदान करे।'' रक्षा मंत्री ने हालांकि दो दिन पहले श्रीलंका के तट के पास अमेरिका द्वारा एक ईरानी युद्धपोत को डुबोए जाने की घटना का प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कोई जिक्र नहीं किया। ईरानी युद्धपोत 'आईरिस देना' भारत की मेजबानी में आयोजित 'मिलन' बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेने के बाद स्वदेश लौट रहा था। इस हमले में कम से कम 87 ईरानी सैन्यकर्मी मारे गए।

यह घटना फारस की खाड़ी से बाहर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाती है। अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान पर सैन्य हमले किए थे जिनमें ईरान के सर्वोच्चा नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे। इस सैन्य हमले के बाद ईरान ने मुख्य रूप से इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन तथा सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए हमले किए। पिछले तीन दिनों में दोनों पक्षों की ओर से हमलों और जवाबी हमलों के बीच यह संघर्ष काफी बढ़ गया है।