शर्मनाकः पुलिस ने बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी और उनके परिवार किए "हाऊस अरैस्ट, कृष्ण भक्तों में मची हाहाकार

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 07:08 PM

police place banke bihari temple s goswami and his family under house arrest

वृन्दावन के बांके बिहारी मंदिर को लेकर कॉरिडोर विवाद फिर गरमा गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मथुरा दौरे से पहले कई गोस्वामी परिवारों को कथित तौर पर नजरबंद किए जाने का आरोप लगा है। गोस्वामी समाज ने इसे तानाशाही बताते हुए कहा कि उनकी आवाज दबाने...

International Desk: दुनिया भर के कृष्ण भक्तों की आस्था के केंद्र  वृन्दावन  के  बांके बिहारी मंदिर ( Banke Bihari Temple) को लेकर प्रशासन  का फिर हटलरी रवैया सामने आया है। इस बार स्थानीय प्रशासन व पुलिस ने मुख्यमंत्री सुरक्षा के नाम पर  बांके बिहारी मंदिर के गोस्वामी समाज के साथ शर्मनाक रवैया अपनाते हुए उनको व उनके परिवारों को नजरबंद कर दिया । दरअसल गोस्वामी समाज  मंदिर  व्यवस्था के लिए बनाई गई सरकार की हाई पावर कमेटी की  ज्यादतियों से तंग है और आए दिन कमेटी और गोस्वामियों के बीच टकराव हो रहा है।

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गोस्वामी घरों में बंधक बनाए
लेकिन हद तो तब हो गई जब उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ ( Yogi Adityanath) के मथुरा दौरे की सूचना पर गोस्वामी परिवारों घरों में बंधक बनाकर उन पर पुलिस की तैनाती कर दी गई ताकि वे बाहर न निकल सकें और  मुख्यमंत्री के समक्ष सच बयान न कर सकें । गोस्वामी समाज ने आरोप लगाया है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े मुद्दों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का रवैया कठोर होता जा रहा है। गोस्वामी समाज का कहना है कि मंदिर व्यवस्था के लिए बनाई गई सरकार की हाई पावर कमेटी के साथ उनका लंबे समय से टकराव चल रहा है। उनका आरोप है कि कमेटी के फैसलों और प्रशासनिक दखल से मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

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मुख्यमंत्री के दौरे से पहले नजरबंदी 
गोस्वामी समुदाय का आरोप है कि जैसे ही Yogi Adityanath के मथुरा दौरे की सूचना मिली, स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने कई गोस्वामी परिवारों को उनके घरों में ही रोक दिया। उनके घरों के बाहर पुलिस तैनात कर दी गई ताकि वे बाहर न निकल सकें।गोस्वामी समाज का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि वे मुख्यमंत्री के सामने मंदिर से जुड़ी अपनी समस्याएं और शिकायतें न रख सकें।

 

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“हम भगवान के सेवक हैं, अपराधी नहीं”
 बांके बिहारी मंदिर के मुख्य सेवायत  अनंत गोस्वामी (Anant Goswami) व सुधांशु गोस्वामी ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए गोस्वामी समाज ने कहा कि वे कोई आतंकवादी या अपराधी नहीं हैं, बल्कि भगवान के सेवक हैं। उनके साथ इस तरह का व्यवहार करना पूरी तरह अनुचित है और समाज इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। मंदिर के अनंत गोस्वामी ने कहा कि उन्हें नजरबंद करके स्थानीय अधिकारी सच को दबाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कुछ अधिकारी कथित रूप से भूमाफिया के प्रभाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री के सामने सिर्फ भाजपा समर्थक ही अपनी समस्याएं रख सकते हैं।

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संवाद को तैयार नहीं सरकार
गोस्वामी समाज का आरोप  है कि प्रशासन ने सुरक्षा का हवाला देकर उनके आवागमन पर रोक लगा दी। कुछ लोगों ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अभद्र व्यवहार के आरोप भी लगाए।। गोस्वामी समाज का कहना है कि यह कदम धार्मिक परंपराओं और सेवायत अधिकारों का अपमान है। इन घटनाओं के बाद वृन्दावन में गोस्वामी समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मंदिर की परंपराओं और पुजारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर बिना संवाद के फैसले किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।

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क्या है कॉरिडोर विवाद?
बांके बिहारी मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ प्रबंधन और सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार मंदिर के आसपास एक बड़ा कॉरिडोर बनाने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि, गोस्वामी समाज का कहना है कि इस परियोजना से मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था और सेवायतों के अधिकार प्रभावित होंगे। इसी मुद्दे को लेकर लंबे समय से विवाद और विरोध जारी है। 

 

क्यों बढ़ रहा विवाद?
विशेषज्ञों के अनुसार यह विवाद इसलिए भी बड़ा हो रहा है क्योंकि वृन्दावन विश्वभर में कृष्ण भक्तों का प्रमुख तीर्थ है। विदेशों में बसे लाखों हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था भी इस मंदिर से जुड़ी है। ऐसे में धार्मिक विरासत और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन का मुद्दा अब राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय भी बन सकता है। स्थिति को देखते हुए कई धार्मिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन और गोस्वामी समाज के बीच संवाद की मांग की है। उनका कहना है कि बातचीत के माध्यम से ही ऐसा समाधान निकाला जा सकता है जिससे श्रद्धालुओं की सुविधा भी बढ़े और मंदिर की परंपराएं भी सुरक्षित रहें।


 

 

 

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