Edited By Radhika,Updated: 20 May, 2026 12:28 PM

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज सत्संग और विचार आज लाखों लोगों को सही राह दिखा रहे हैं। महाराज जी का ऐसा मानना है कि मनुष्य के जीवन में आने वाले कई संकट उसकी खुद की असावधानी और गलतियों का नतीजा होते हैं। अक्सर हम अपनी बेहद निजी बातें...
नेशनल डेस्क: वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद जी महाराज सत्संग और विचार आज लाखों लोगों को सही राह दिखा रहे हैं। महाराज जी का ऐसा मानना है कि मनुष्य के जीवन में आने वाले कई संकट उसकी खुद की असावधानी और गलतियों का नतीजा होते हैं। अक्सर हम अपनी बेहद निजी बातें दूसरों के सामने बोल देते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा (बुरी नजर) हमारे बनते कामों को बिगाड़ देती है। सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने के लिए प्रेमानंद जी महाराज ने ऐसी 7 बातों का जिक्र किया है, जिन्हें हमेशा गुप्त (सीक्रेट) रखना चाहिए:
1. भविष्य की योजनाओं के बारे में
महाराज जी के अनुसार, अपनी भविष्य की किसी भी योजना या फिर बड़े लक्ष्य के बारे में किसी को तब तक नहीं बताना चाहिए, जबतक पूरा न हो जाए। काम पूरा होने से पहले ही उसका ढिंढोरा पीटने से उसमें रुकावटें आने की संभावना बढ़ जाती है।
2. अपनी कमियां और कमज़ोरियाँ
आज के समय में हर व्यक्ति पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता। अपनी दुर्बलताओं या कमियों को कभी भी किसी बाहरी व्यक्ति के सामने जाहिर न करें, क्योंकि वक्त आने पर लोग इसी का फायदा उठाकर आपको ठेस पहुंचा सकते हैं।

3. पारिवारिक और दांपत्य जीवन के राज
पति-पत्नी के आपसी संबंध और घर-परिवार की बातें अपने घर तक ही रखनी चाहिए। अपने पारिवारिक मामलों को बाहर ले जाने से आपस में दूरियां बढ़ती हैं, बल्कि बाहरी लोगों को दखल देने का मौका मिल जाता है।
4. हर राह चलते के सामने दुख का रोना रोना
अपनी परेशानियों और दुखड़ों के बारे में किसी से जिक्र नहीं करना चाहिए। महाराज जी कहते हैं कि संसार में सच्चे हमदर्द बहुत कम हैं; ज्यादातर लोग आपकी तकलीफों का पीठ पीछे मजाक उड़ाएंगे। अपनी हर व्यथा केवल ईश्वर के सामने कहें।
5. धन-दौलत और कामयाबी का दिखावा
अपने पैसे को सभी से छिपा कर रखना चाहिए। अपनी सफलता को जितना सादगी से रखेंगे, उतना ही सुखी रहेंगे। अपनी आर्थिक स्थिति या तरक्की का जरूरत से ज्यादा प्रदर्शन लोगों में ईर्ष्या और नकारात्मकता को जन्म देता है।
6. साधना, पूजा-पाठ और मंत्र जाप
अपनी साधना, भक्ति, पूजा- पाठ को एकांत तक सीमित रखना चाहिए। अपनी पूजा, मंत्र जाप या धार्मिक अनुष्ठानों का दिखावा करने से उसका आध्यात्मिक पुण्य खत्म हो जाता है।
7. गुप्त दान और परोपकार (नेक काम)
अगर आपने किसी जरूरतमंद की मदद की है या कोई अच्छा काम किया है, तो उसे अपने तक ही सीमित रखें। शास्त्रों और महाराज जी के अनुसार, गुप्त रूप से की गई सेवा और भलाई ही ईश्वर को स्वीकार्य होती है और उसी का वास्तविक शुभ फल मिलता है।