इंडोनेशिया पाम ऑयल-कोयला निर्यात करेगा बैन, कहा-कंपनियां 100% विदेशी कमाई सरकारी बैंकों में कराएं जमा

Edited By Updated: 20 May, 2026 03:10 PM

indonesia s prabowo announces export controls for coal palm oil

Indonesia ने पाम ऑयल, कोयला और फेरोएलॉय जैसे प्रमुख कमोडिटी निर्यात को सरकारी नियंत्रण में लाने का बड़ा फैसला किया है। राष्ट्रपति Prabowo Subianto का दावा है कि सस्ते दामों पर संसाधन बेचने से देश को दशकों में भारी नुकसान हुआ।

International Desk: इंडोनेशिया  के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने देश की प्रमुख कमोडिटी निर्यात व्यवस्था को सरकारी नियंत्रण में लाने का ऐलान किया है। इस नई नीति के तहत पाम ऑयल, कोयला और फेरोएलॉय जैसे प्रमुख निर्यात अब सरकार द्वारा चुनी गई सरकारी कंपनी के जरिए ही बेचे जाएंगे। राष्ट्रपति प्रबोवो ने संसद में भाषण देते हुए कहा कि पिछले 34 वर्षों में इंडोनेशिया को अपने प्राकृतिक संसाधन सस्ते दामों पर बेचने के कारण लगभग 908 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि देश के संसाधनों का लाभ पूरे इंडोनेशिया के लोगों को मिलना चाहिए। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा पाम ऑयल और थर्मल कोयला निर्यातक माना जाता है। ऐसे में इस फैसले का असर वैश्विक कमोडिटी बाजार पर भी पड़ सकता है।

 

सरकार के अनुसार शुरुआती चरण में कोयला, पाम ऑयल और फेरोएलॉय को इस नई व्यवस्था में शामिल किया जाएगा। हर तीन महीने में समीक्षा कर अन्य कमोडिटी को भी जोड़ा जा सकता है। सरकार ने तीन महीने की ट्रांजिशन अवधि भी दी है, जिसमें निर्यातक और खरीदार पहले की तरह कारोबार जारी रख सकेंगे। हालांकि इस दौरान सरकारी एजेंसी सभी निर्यात सौदों की निगरानी करेगी। बाद में सभी निर्यात केवल सरकारी नियुक्त कंपनी के जरिए ही होंगे। इस योजना की निगरानी इंडोनेशिया के संप्रभु संपत्ति कोष Danantara Indonesia द्वारा की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने एक और बड़ा नियम लागू किया है।

 

अब 1 जून से प्राकृतिक संसाधनों का निर्यात करने वाली सभी कंपनियों को अपनी 100% विदेशी कमाई इंडोनेशिया के सरकारी बैंकों में जमा करनी होगी। सरकार का कहना है कि इससे देश की मुद्रा रुपिया को स्थिर रखने में मदद मिलेगी। इस फैसले की खबर आते ही बाजार में चिंता बढ़ गई। निवेशकों को डर है कि नई व्यवस्था से कीमत निर्धारण प्रणाली बदल सकती है और ट्रेडिंग कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से जकार्ता शेयर बाजार में भारी गिरावट भी देखी गई।हालांकि कई अर्थशास्त्रियों ने इस योजना पर सवाल उठाए हैं। University of Indonesia के व्यापार विशेषज्ञ रिज्की सिरेगर का कहना है कि नई एजेंसी बाजार में और ज्यादा विकृतियां पैदा कर सकती है, बजाय समस्या हल करने के।

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