'ममता मेरी छोटी बहन जैसी, लेकिन शायद नाराज हैं': राष्ट्रपति मुर्मू ने बंगाल सरकार पर साधा निशाना!

Edited By Updated: 07 Mar, 2026 07:13 PM

president droupadi murmu west bengal visit

पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी दौरे के दौरान राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने राज्य सरकार की व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर सार्वजनिक रूप से असंतोष जाहिर किया।

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी दौरे के दौरान राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने राज्य सरकार की व्यवस्था और प्रोटोकॉल को लेकर सार्वजनिक रूप से असंतोष जाहिर किया। 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचीं राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल बदलने और स्वागत व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। अपने संबोधन में उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि वे “बंगाल की बेटी” हैं और राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को अपनी “छोटी बहन” मानती हैं, लेकिन शायद मुख्यमंत्री उनसे नाराज हैं क्योंकि उनके स्वागत के लिए न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई वरिष्ठ मंत्री मौजूद था।

कार्यक्रम स्थल बदलने पर जताई आपत्ति

यह कार्यक्रम मूल रूप से सिलीगुड़ी के बिधाननगर इलाके में आयोजित होना था, जहां बड़ी संख्या में संथाल समुदाय के लोगों के पहुंचने की संभावना थी। लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन का हवाला देते हुए अंतिम समय में कार्यक्रम स्थल बदलकर गोसाईपुर कर दिया, जो बागडोगरा एयरपोर्ट के पास स्थित है। राष्ट्रपति ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिधाननगर में कार्यक्रम आयोजित करने में कोई दिक्कत नहीं दिख रही थी और वहां बड़ी संख्या में लोग आसानी से इकट्ठा हो सकते थे।

खाली कुर्सियों पर भी की टिप्पणी

गोसाईपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कई सीटें खाली दिखाई दीं। इस पर भी राष्ट्रपति ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि किसी ने कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की है। बाद में राष्ट्रपति खुद बिधाननगर पहुंचीं और वहां का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में एक पौधा भी लगाया और स्थानीय लोगों से मुलाकात की।

आयोजकों का आरोप, कई प्रतिनिधियों को नहीं मिला पास

कार्यक्रम से जुड़े आयोजकों का कहना है कि कई संथाल प्रतिनिधियों को सुरक्षा पास नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोक दिया गया, जिससे उपस्थिति प्रभावित हुई। हालांकि सिलीगुड़ी के मेयर Gautam Deb ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा कारणों से स्थल बदलना जरूरी था और राज्य सरकार की ओर से राष्ट्रपति का स्वागत किया गया।

प्रोटोकॉल को लेकर भी उठे सवाल

आम तौर पर राष्ट्रपति के किसी राज्य दौरे पर मुख्यमंत्री या कैबिनेट स्तर का मंत्री स्वागत के लिए मौजूद रहता है। इस बार ऐसा नहीं होने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने संथाल समुदाय की भूमिका की सराहना करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद किया और शिक्षा व विकास पर जोर दिया।

सियासी हलकों में बढ़ी चर्चा

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ लोग इसे केंद्र और राज्य के बीच राजनीतिक तनाव से जोड़कर भी देख रहे हैं। हालांकि राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनके मन में मुख्यमंत्री के प्रति कोई व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है और वे उनके लिए शुभकामनाएं रखती हैं।

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