Edited By Radhika,Updated: 06 Mar, 2026 08:39 PM

रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका द्वारा भारत को दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट (Waiver) पर देश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने इसे भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए केंद्र की मोदी सरकार की...
नेशनल डेस्क: रूसी तेल खरीद को लेकर अमेरिका द्वारा भारत को दी गई 30 दिनों की अस्थायी छूट (Waiver) पर देश में सियासी घमासान शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद जयराम रमेश ने इसे भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए केंद्र की मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी ANI से बात करते हुए जयराम रमेश ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की घोषणा को "अत्यधिक आपत्तिजनक" बताया। उन्होंने कहा, "यह हमारी संप्रभुता का मुद्दा है। हमारी सरकार को यह तय करना चाहिए कि हम कहां से, कब और कितना तेल खरीदेंगे। अमेरिका हमें सर्टिफिकेट देने वाला कौन होता है? इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और तेल मंत्री चुप क्यों हैं?"
संसद में उठेगा 'ट्रेड डील' और संप्रभुता का मुद्दा
जयराम रमेश ने सरकार को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाएगी। उन्होंने वाशिंगटन से आने वाली घोषणाओं पर आपत्ति जताते हुए कहा, "हमें सारी जानकारी वाशिंगटन से क्यों मिल रही है? चाहे रूसी तेल की बात हो या 'ऑपरेशन सिंदूर' को रोकने की, पहली घोषणा अमेरिकी अधिकारियों द्वारा की जाती है। सिर्फ बयानों से काम नहीं चलेगा, वाणिज्य और विदेश मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा होनी चाहिए।"

खतरे में है रणनीतिक स्वायत्तता - मल्लिकार्जुन खड़गे
इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय संप्रभुता गंभीर खतरे में है। खड़गे ने लिखा, "PM मोदी 'एपस्टीन फाइल्स' और 'अडानी केस' को लेकर ब्लैकमेल हो रहे हैं। अमेरिका द्वारा रूसी तेल खरीदने के लिए 'अनुमति' देना या 'छूट' देना यह दर्शाता है कि मोदी सरकार कूटनीतिक जमीन खो रही है। इस तरह की भाषा प्रतिबंधित देशों के लिए इस्तेमाल की जाती है, भारत जैसे समान भागीदार के लिए नहीं।"
क्या है पूरा मामला?
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भीषण संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित हुई है। इसे देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की विशेष छूट दी है। हालांकि, वाशिंगटन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह इस अवधि के बाद भारत से अमेरिकी तेल की खरीद बढ़ाने की उम्मीद करता है।
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 40% हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आयात करता है, जो मुख्य रूप से रणनीतिक 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है। युद्ध के कारण यह मार्ग असुरक्षित हो गया है, जिससे भारत के उर्वरक और सिरेमिक उद्योग पर भी संकट मंडरा रहा है।