Edited By Anu Malhotra,Updated: 23 Jan, 2026 11:14 AM

वित्तीय लेखक और Rich Dad Poor Dad के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी (Robert Kiyosaki) ने ट्विट कर 2026 के लिए चांदी को लेकर एक बड़ा दावा किया है कि यह 200 डॉलर प्रति औंस (लगभग ₹7 लाख प्रति किलोग्राम) तक पहुंच सकती है, क्योंकि यह एक औद्योगिक धातु के रूप में और...
नेशनल डेस्क: वित्तीय लेखक और Rich Dad Poor Dad के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी (Robert Kiyosaki) ने ट्विट कर 2026 के लिए चांदी को लेकर एक बड़ा दावा किया है कि यह 200 डॉलर प्रति औंस (लगभग ₹7 लाख प्रति किलोग्राम) तक पहुंच सकती है, क्योंकि यह एक औद्योगिक धातु के रूप में और मुद्रा के रूप में महत्वपूर्ण है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनलों और इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी बढ़ती मांग के कारण, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह निश्चित नहीं है और इसमें उतार-चढ़ाव आ सकता है। उन्होंने इसे चांदी के ऐतिहासिक महत्व और आधुनिक तकनीक में इसकी बढ़ती भूमिका से जोड़ा।
कियोसाकी के अनुसार, चांदी सिर्फ निवेश का जरिया नहीं बल्कि उद्योगों में भी महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह भविष्यवाणी निश्चित नहीं है और कीमतों में उतार-चढ़ाव हो सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर उन्होंने लिखा कि चांदी हमेशा से मुद्रा और मूल्य का प्रतीक रही है। अब यह आधुनिक तकनीकी दुनिया में एक “संरचनात्मक धातु” के रूप में उभर रही है, ठीक वैसे ही जैसे औद्योगिक युग में लोहा था।
कियोसाकी ने बताया कि 1990 में चांदी की कीमत लगभग 5 डॉलर प्रति औंस थी, जबकि आज यह 92-95 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच चुकी है। उनका मानना है कि यह न केवल निवेश का जरिया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में इसका महत्व भी लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्यवाणी गलत भी हो सकती है, लेकिन वे चांदी की लंबी अवधि में क्षमता और आर्थिक महत्व पर भरोसा बनाए हुए हैं। इस भविष्यवाणी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों के बीच चर्चा को बढ़ा दिया है। अब सवाल यह है कि क्या चांदी सच में 200 डॉलर के स्तर को छू पाएगी, या यह सिर्फ एक संभावित भविष्यवाणी ही रहेगी।