बुधवार को अचानक रोकी गई Gold-Silver की ट्रेडिंग, जानिए वजह?

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 11:42 AM

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बुधवार को सोना-चांदी के वैश्विक निवेशकों के लिए ट्रेडिंग सत्र असामान्य रहा, जब अमेरिका के CME Globex पर तकनीकी दिक्कत के चलते मेटल्स फ्यूचर्स की ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। कुछ समय तक गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में कारोबार ठप रहा, जिससे बाजार...

बिजनेस डेस्कः बुधवार को सोना-चांदी के वैश्विक निवेशकों के लिए ट्रेडिंग सत्र असामान्य रहा, जब अमेरिका के CME Globex पर तकनीकी दिक्कत के चलते मेटल्स फ्यूचर्स की ट्रेडिंग अस्थायी रूप से रोकनी पड़ी। कुछ समय तक गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में कारोबार ठप रहा, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई और निवेशकों के बीच सवाल उठने लगे कि आगे कीमतों की दिशा क्या होगी।

क्यों रोकी गई ट्रेडिंग?

तकनीकी समस्या आने के बाद एक्सचेंज ने दोपहर 12:15 बजे (CT) गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में ट्रेडिंग अस्थायी रूप से बंद कर दी। बाद में बाजार को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोला गया। ऐसे मामलों में एक्सचेंज का उद्देश्य बाजार की स्थिरता बनाए रखना और किसी भी संभावित सिस्टम एरर या गलत ऑर्डर से बचाव करना होता है। यह कदम आमतौर पर तकनीकी सुरक्षा के तहत उठाया जाता है, न कि कीमतों को प्रभावित करने के लिए।

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आम निवेशकों के लिए क्या मायने?

ट्रेडिंग रुकना अपने आप में तेजी या गिरावट का संकेत नहीं होता लेकिन जब बाजार अचानक थमता है, तो दो अहम स्थितियां बनती हैं:

  • निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ती है
  • दोबारा खुलने पर तेज उतार-चढ़ाव (वोलैटिलिटी) देखने को मिल सकता है

इसी वजह से रीओपन के बाद ट्रेडर्स आम तौर पर ज्यादा सतर्क रहते हैं।

पिछली घटना से क्या सबक?

करीब तीन महीने पहले भी इसी तरह की तकनीकी रुकावट देखी गई थी। उस समय ट्रेडिंग बहाल होने के बाद सिल्वर में तेज उछाल आया था, क्योंकि शॉर्ट पोजिशन कवरिंग ने कीमतों को सपोर्ट दिया। हालांकि हर बार इतिहास दोहराया जाए, यह जरूरी नहीं है लेकिन पुराने अनुभव के चलते इस बार भी बाजार की नजर रीओपन के बाद की चाल पर टिकी हुई है।

निवेशकों के लिए सलाह

ऐसी तकनीकी रुकावटें बाजार का हिस्सा होती हैं। जल्दबाजी में खरीदारी या बिकवाली करना जोखिम बढ़ा सकता है। असली दिशा रीओपन के बाद आने वाले वॉल्यूम, ट्रेंड और वैश्विक संकेतों से तय होती है।

लॉन्ग टर्म निवेशकों को एक घटना के आधार पर रणनीति बदलने की जरूरत नहीं है, जबकि शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को संभावित वोलैटिलिटी के लिए तैयार रहना चाहिए।
 

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