Edited By Ramanjot,Updated: 22 Jan, 2026 12:39 AM

बिहार के रोहतास जिले के भगवानपुर गांव में प्रेम संबंध से उपजे एक खौफनाक हत्याकांड पर आखिरकार अदालत ने सख्त फैसला सुना दिया है।
नेशनल डेस्क: बिहार के रोहतास जिले के भगवानपुर गांव में प्रेम संबंध से उपजे एक खौफनाक हत्याकांड पर आखिरकार अदालत ने सख्त फैसला सुना दिया है। करीब साढ़े छह से सात साल पुराने इस मामले में जिला न्यायाधीश अनिल कुमार की अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही प्रत्येक दोषी पर 5,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि सम्मान या रिश्तों के नाम पर की गई हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मार्च 2019 की वह खौफनाक रात
यह सनसनीखेज वारदात मार्च 2019 में सामने आई थी। गांव के युवक मन्नु कुमार की हत्या बेहद निर्मम तरीके से की गई थी। हत्या के बाद आरोपियों ने शव के साथ अमानवीय व्यवहार किया—पेट को चाकू से चीर दिया गया और गुप्तांग काटकर पास के सरसों के खेत में टांग दिया गया। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।
मृतक के पिता अशोक चौधरी की शिकायत पर अगरेर थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई थी, जिसके बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया।
इन चार लोगों को ठहराया गया दोषी
अदालत ने जिन चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, वे हैं—
- मन्नु की प्रेमिका सुमन देवी (उर्फ चुमन देवी)
- सुमन का पति प्रभाकर सिंह
- सुमन के पिता दुधेश्वर चौधरी
- सुमन का भाई फूलचंद
अभियोजन के मुताबिक, यह हत्या पूरी तरह पूर्व-नियोजित साजिश थी।
कैसे रची गई साजिश?
अभियोजन पक्ष ने बताया कि घटना से महज दो दिन पहले सुमन देवी अपने पति के साथ प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) से मायके भगवानपुर आई थी। 4 मार्च 2019 की शाम को सुमन ने खुद मन्नु को फोन कर मिलने के लिए बुलाया। मन्नु बिना किसी को बताए घर से निकला, लेकिन फिर कभी लौटकर नहीं आया। अगले दिन 5 मार्च को उसका क्षत-विक्षत शव खेत में बरामद हुआ।
अदालत में पेश हुए मजबूत सबूत
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपर लोक अभियोजक अनिल कुमार सिंह ने 9 गवाहों को अदालत में पेश किया। गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों से यह स्पष्ट हुआ कि यह हत्या प्रेम संबंध और तथाकथित पारिवारिक सम्मान के नाम पर की गई थी।
अदालत को यह भी बताया गया कि हत्या से पहले मन्नु को कुछ समय के लिए बंधक बनाया गया था और गांव में पंचायत भी हुई थी, लेकिन इसके बावजूद संबंध जारी रहने से आरोपी पक्ष नाराज था। बचाव पक्ष की दलीलें मजबूत साक्ष्यों के सामने टिक नहीं सकीं। फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने अदालत का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें आखिरकार न्याय मिला है।