Edited By Anu Malhotra,Updated: 05 Apr, 2026 01:17 PM

Kidney Problems: दुनिया भर में कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने और हार्ट रोगों से बचाव के लिए स्टैटिन दवाओं का उपयोग आम है। रोसुवास्टेटिन इसी कैटेगरी की एक प्रमुख दवा है। हाल ही में अमेरिका की जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी (Johns Hopkins University) के...
Kidney Problems: दुनियाभर में दिल को हैल्थी रखने और बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाने के लिए स्टैटिन दवाओं का सहारा लिया जाता है। इन्हीं में से एक बेहद मशहूर दवा है रोसुवास्टेटिन। डॉक्टर अक्सर इसे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए लिखते हैं, लेकिन हाल ही में अमेरिका की जानी-मानी जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नया खुलासा किया है। इस रिसर्च के केंद्र में यह सवाल है कि क्या यह असरदार दवा आपकी किडनी के लिए अनजाने में कोई मुसीबत तो खड़ी नहीं कर रही है? आईए जानते है क्या कहती है रिसर्च...
दरअसल, यह चिंता नई नहीं है। जब सालों पहले US Food and Drug Administration (FDA) ने इस दवा को पहली बार हरी झंडी दी थी, तभी कुछ शुरुआती क्लीनिकल ट्रायल्स में मरीजों के यूरिन में खून और प्रोटीन जैसे लक्षण देखे गए थे, जो किडनी की खराबी का शुरुआती संकेत माने जाते हैं। हालांकि, उस वक्त इस पर गहराई से गौर नहीं किया गया। अब शोधकर्ताओं ने करीब 9 लाख लोगों के स्वास्थ्य डेटा का बारीकी से विश्लेषण कर इस कमी को पूरा किया है, जिसमें रोसुवास्टेटिन की तुलना एक अन्य प्रसिद्ध दवा एटोरवास्टेटिन से की गई है।
मरीज को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट तक की आ सकती नौबत
तीन साल तक चले इस लंबी स्टडी के नतीजे बताते हैं कि रोसुवास्टेटिन का सेवन करने वाले मरीजों में किडनी से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम तुलनात्मक रूप (comparative forms) से अधिक है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो इस दवा को लेने वालों में यूरिन के जरिए खून आने यानी हेमेट्यूरिया का खतरा 8 प्रतिशत और यूरिन में प्रोटीन निकलने यानी प्रोटीन्यूरिया का खतरा 17 प्रतिशत तक ज्यादा पाया गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जो लोग इस दवा की उच्च खुराक (High Dose) ले रहे थे, उनमें किडनी फेल्योर जैसी गंभीर स्थिति का खतरा 15 प्रतिशत तक बढ़ गया, जहां मरीज को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है।
रिसर्च में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है कि कई बार उन मरीजों को भी रोसुवास्टेटिन की भारी डोज दी जा रही थी जिनकी किडनी पहले से ही कमजोर थी, जो कि स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।
वहीं दूसरी ओर, दिलचस्प बात यह है कि दिल की बीमारियों से बचाने के मामले में रोसुवास्टेटिन और एटोरवास्टेटिन दोनों ही एक समान रूप से प्रभावी साबित हुई हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं का चुनाव करते समय मरीज की किडनी की सेहत को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। यह रिसर्च चेतावनी देती है कि कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह भी जरूरी है कि इलाज का तरीका शरीर के अन्य अंगों पर भारी न पड़े।
Disclaimer: यह जानकारी विभिन्न रिसर्च स्टडीज पर आधारित है इसे चिकित्सकीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। किसी भी दवा या व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।