Edited By Ramkesh,Updated: 17 May, 2026 09:41 AM

कनाडा की सुरक्षा खुफिया एजेंसी CSIS की नई सार्वजनिक रिपोर्ट 2025 ने खालिस्तानी उग्रवाद को लेकर बड़ा और सख्त संकेत दिया है। 1 मई 2026 को जारी इस रिपोर्ट में पहली बार साफ तौर पर कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय कुछ खालिस्तानी उग्रवादी नेटवर्क देश की...
इंटरनेशनल डेस्क: कनाडा की सुरक्षा खुफिया एजेंसी CSIS की नई सार्वजनिक रिपोर्ट 2025 ने खालिस्तानी उग्रवाद को लेकर बड़ा और सख्त संकेत दिया है। 1 मई 2026 को जारी इस रिपोर्ट में पहली बार साफ तौर पर कहा गया है कि कनाडा में सक्रिय कुछ खालिस्तानी उग्रवादी नेटवर्क देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और कनाडाई हितों के लिए खतरा बने हुए हैं।
CSIS की चेतावनी, भारत को निशाना बनाने की योजना
रिपोर्ट में इन गतिविधियों को “राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक उग्रवाद” की श्रेणी में रखा गया है। CSIS ने चेतावनी दी है कि कनाडा की धरती का इस्तेमाल हिंसा फैलाने, फंडिंग जुटाने और भारत को निशाना बनाने वाली गतिविधियों की योजना तैयार करने के लिए किया जा रहा है।
खालिस्तानी चरमपंथ का असर कनाडा पर भी
रिपोर्ट में 1985 के एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान गई थी। एजेंसी ने इसे इस बात की याद दिलाने वाला उदाहरण बताया कि खालिस्तानी चरमपंथ का असर केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कनाडा भी इसकी हिंसा झेल चुका है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया कि खालिस्तान के समर्थन में शांतिपूर्ण विचार रखना कनाडा के कानून के तहत सुरक्षित है। लेकिन जो लोग हिंसा, फंडिंग या आतंकी गतिविधियों से जुड़े हैं, उन्हें सुरक्षा एजेंसियां गंभीर खतरे के रूप में देख रही हैं।
हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड का जिक्र नहीं
रिपोर्ट में किसी संगठन या व्यक्ति का सीधा नाम नहीं लिया गया, लेकिन भारत लंबे समय से जिन गैंगस्टर और खालिस्तानी नेटवर्क पर आरोप लगाता रहा है, उनकी गतिविधियों पर अप्रत्यक्ष रूप से चिंता जताई गई है। भारत पहले भी कनाडा पर ऐसे तत्वों को सुरक्षित पनाह देने का आरोप लगाता रहा है। दिलचस्प बात यह रही कि रिपोर्ट में हरदीप सिंह निज्जर हत्याकांड का जिक्र नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर, कनाडा ने भारत पर विदेशी हस्तक्षेप और सिख एक्टिविस्टों की निगरानी जैसे आरोपों को भी दोहराया है। CSIS सार्वजनिक रिपोर्ट 2025 कनाडा में खालिस्तानी मुद्दे को लेकर एक प्रगतिशील और अधिक संतुलित जांच की ओर एक क्रमिक बदलाव को दर्शाती है।
रिसर्च एसोसिएट इंस्टीच्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट की यह रिपोर्ट दिखाती है कि कनाडा अब खालिस्तानी उग्रवाद को केवल भारत-कनाडा विवाद के रूप में नहीं, बल्कि अपनी घरेलू राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के तौर पर देखने लगा है।