रूसी कपल का अवैध रियल एस्टेट खेल, कोर्ट ने संपत्ति कुर्क करने का दिया आदेश

Edited By Updated: 05 Dec, 2024 02:40 PM

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उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक रूसी दंपति ने अवैध तरीके से एक इमारत बनवाई और उसे किराए पर देने के अलावा बेचा भी। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि इमारत को कुर्क किया जाए। इस मामले में आरोप है कि दंपति ने धार्मिक ट्रस्ट की आड़ में अवैध रियल एस्टेट...

नॅशनल डेस्क। उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक रूसी दंपति ने अवैध तरीके से एक इमारत बनवाई और उसे किराए पर देने के अलावा बेचा भी। इस पर कोर्ट ने आदेश दिया है कि इमारत को कुर्क किया जाए। इस मामले में आरोप है कि दंपति ने धार्मिक ट्रस्ट की आड़ में अवैध रियल एस्टेट कारोबार किया और इसके जरिए करोड़ों रुपये कमाए।

क्या है मामला?

मथुरा के वृंदावन इलाके में एक रूसी दंपति ने एक सात मंजिला इमारत बनाई। इस इमारत को किराए पर दिया जा रहा था और उसे बेचा भी जा रहा था। इस इमारत की कीमत लगभग 29.22 करोड़ रुपये बताई जा रही है। यह इमारत मथुरा के रमणरेती क्षेत्र में स्थित है। दंपति ने इस इमारत के निर्माण के लिए अवैध तरीके से पैसे जुटाए थे।

कपल ने क्या किया?

कहा जा रहा है कि यह दंपति नतालिया क्रिवोनोसोवा (निष्ठा रानी देवीदासी) और उनके पति यारोस्लाव रोमानोव (श्यामसुंदर चरण दास) पर्यटक वीजा पर भारत आए थे और वृंदावन में एक धार्मिक ट्रस्ट बनाया लेकिन बाद में यह सामने आया कि वे धार्मिक गतिविधियों के नाम पर अवैध रियल एस्टेट लेन-देन कर रहे थे। उन्होंने ट्रस्ट की आड़ में फ्लैट्स किराए पर देना शुरू किया और बेचने भी लगे।

मामले का खुलासा कैसे हुआ?

स्थानीय लोगों ने इनकी गतिविधियों के बारे में शिकायत की जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में यह पाया गया कि दंपति के द्वारा बनाई गई इमारत अवैध रूप से अर्जित धन से बनाई गई थी। इसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की और तत्कालीन जिलाधिकारी ने इमारत को कुर्क करने का आदेश दिया।

कोर्ट का फैसला

जब दंपति ने इस आदेश को कोर्ट में चुनौती दी तो कोर्ट ने उनके खिलाफ फैसला सुनाया। 30 जून 2023 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने दंपति की याचिका खारिज कर दी थी और इमारत को कुर्क करने का आदेश दिया था। इसके बाद दंपति ने इस फैसले को चुनौती दी लेकिन शनिवार को अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश पल्लवी अग्रवाल ने इस आदेश को बरकरार रखा।

इमारत का मूल्य और आकार

इस इमारत का आकार 1412.72 वर्ग मीटर है और इसका अनुमानित मूल्य 29.22 करोड़ रुपये है। इसे "रूसी बिल्डिंग" के नाम से जाना जाता है।

पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

विशेष लोक अभियोजक शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि इस मामले में पुलिस ने जांच के दौरान दंपति की गतिविधियों को धोखाधड़ी वाली पाया। यह साबित हुआ कि वे अवैध रूप से संपत्ति अर्जित कर रहे थे और रियल एस्टेट कारोबार चला रहे थे।

वहीं अब कोर्ट ने इमारत को कुर्क करने के आदेश को बरकरार रखते हुए यह साबित कर दिया कि दंपति की गतिविधियां कानून के खिलाफ थीं और अवैध रूप से संपत्ति बनाई गई थी।

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