फोन पर अस्पताल में अपॉइंटमेंट लेने वालों को निशाना बना रहे स्कैमर्स, पुलिस ने जारी की चेतावनी

Edited By Updated: 21 Sep, 2026 08:38 AM

sca mmers targeting people booking hospital appointments over the phone

पुलिस ने लोगों को एक ऐसे फाइनेंशियल फ्रॉड के बारे में चेतावनी दी है जिसमें साइबर अपराधी अस्पताल में अपॉइंटमेंट और कॉन्टैक्ट डिटेल्स ऑनलाइन खोजने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं और उन्हें खतरनाक एंड्रायड एप्लिकेशन पैकेज (APK) फाइलें इंस्टॉल करने के...

तिरुवनंतपुरम : पुलिस ने लोगों को एक ऐसे फाइनेंशियल फ्रॉड के बारे में चेतावनी दी है जिसमें साइबर अपराधी अस्पताल में अपॉइंटमेंट और कॉन्टैक्ट डिटेल्स ऑनलाइन खोजने वाले लोगों को निशाना बनाते हैं और उन्हें खतरनाक एंड्रायड एप्लिकेशन पैकेज (APK) फाइलें इंस्टॉल करने के लिए धोखा देते हैं। 

खबरों के मुताबिक स्कैमर्स गूगल सर्च रिजल्ट में अस्पताल के नकली कॉन्टैक्ट नंबर दिखाते हैं और जब लोग उन नंबरों पर कॉल करते हैं, तो वे अस्पताल के कर्मचारी बनकर बात करते हैं। इसके बाद वे अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक करने या उससे जुड़ी सर्विस देने के बहाने WhatsApp के जरिए APK फाइलें भेजते हैं। पुलिस ने कहा कि ऐसे एप्लिकेशन इंस्टॉल करने से मोबाइल फोन खतरे में पड़ सकते हैं और OTP और UPI से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक हो सकती है, जिससे धोखेबाज बिना इजाजत के फाइनेंशियल (बैंक/UPI) ट्रांजैक्शन कर सकते हैं।

इन खतरनाक एप्लिकेशन का इस्तेमाल डिवाइस पर पहले से इंस्टॉल PhonePe और Google Pay जैसे UPI एप्लिकेशन का गलत इस्तेमाल करने के लिए भी किया जा सकता है और ये यूजर की जानकारी के बिना दूसरे पेमेंट एप्लिकेशन इंस्टॉल करने की सुविधा भी दे सकते हैं। पुलिस ने चेतावनी दी कि यूजर्स को छोटी रकम वाले बिना इजाजत के ट्रांजैक्शन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर UPI Lite वाले फोन बार-बार होने वाले छोटे ट्रांजैक्शन के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं, क्योंकि तय सीमा के अंदर कुछ ट्रांजैक्शन के लिए अलग से OTP की जरूरत नहीं होती है। 

अस्पताल की कॉन्टैक्ट डिटेल्स खोजने वाले लोगों को गूगल सर्च रिजल्ट में दिखाए गए नंबरों पर पूरी तरह भरोसा करने के बजाय अस्पताल की ऑफिशियल वेबसाइट या वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए फोन नंबरों की पुष्टि करनी चाहिए। पुलिस ने लोगों को यह भी सलाह दी कि वे अस्पताल में अपॉइंटमेंट बुक करने, KYC वेरिफिकेशन, रिफंड या इसी तरह के कामों के लिए WhatsApp पर मिली APK फाइलें कभी इंस्टॉल न करें। एप्लिकेशन केवल गूगल प्ले स्टोर जैसे भरोसेमंद प्लेटफॉर्म से ही डाउनलोड किए जाने चाहिए। यूजर्स को अनजान एप्लिकेशन को SMS, नोटिफिकेशन, कॉन्टैक्ट या फोन से जुड़े फंक्शन का एक्सेस देने से भी बचना चाहिए।

अगर किसी को शक हो कि कोई खतरनाक APK इंस्टॉल हो गया है तो उसे तुरंत डिवाइस को इंटरनेट से डिस्कनेक्ट कर देना चाहिए और अपने अकाउंट को सुरक्षित करने के लिए अपने बैंक या UPI सर्विस प्रोवाइडर से संपर्क करना चाहिए।
पुलिस ने कहा कि फाइनेंशियल फ्रॉड के शिकार लोगों को तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करके या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in के जरिए घटना की रिपोर्ट करनी चाहिए। 

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