लखपति दीदी अब बनेंगी बिजनेस वाली दीदी, महिलाओं के लिए खुलेंगे 'सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट्स'

Edited By Updated: 01 Feb, 2026 12:15 PM

self help entrepreneur marts to be opened for women

'लखपति दीदी' योजना की शानदार सफलता के बाद अब केंद्र सरकार ने महिलाओं को छोटे रोजगार से निकालकर बड़ा बिज़नेसमैन (Entrepreneur) बनाने का मास्टरप्लान तैयार किया है। केंद्रीय बजट 2026 के तहत वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि अब स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से...

Lakhpati Didi : 'लखपति दीदी' योजना की शानदार सफलता के बाद अब केंद्र सरकार ने महिलाओं को छोटे रोजगार से निकालकर बड़ा बिज़नेसमैन (Entrepreneur) बनाने का मास्टरप्लान तैयार किया है। केंद्रीय बजट 2026 के तहत वित्त मंत्री ने घोषणा की है कि अब स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाओं को उद्यमिता (Entrepreneurship) की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। इसके लिए सरकार न केवल आर्थिक मदद देगी बल्कि उनके उत्पादों को बेचने के लिए खास बाजार भी मुहैया कराएगी।

क्या हैं 'सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट्स'?

सरकार का सबसे क्रांतिकारी कदम सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट्स (Self-Help Entrepreneur Marts) की स्थापना करना है।

  • सामुदायिक आउटलेट्स: ये क्लस्टर-स्तरीय फेडरेशन के तहत संचालित होने वाले आधुनिक रिटेल स्टोर होंगे।

  • सीधी बिक्री: यहां महिलाएं अपने द्वारा बनाए गए उत्पादों (जैसे अचार, पापड़, हस्तशिल्प, कपड़े आदि) को सीधे ग्राहकों को बेच सकेंगी। इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और मुनाफा सीधे महिलाओं की जेब में जाएगा।

  • नवाचारी वित्तपोषण (Innovative Financing): महिलाओं को अपना बिजनेस शुरू करने या बढ़ाने के लिए आसान शर्तों पर लोन और नई वित्तीय सुविधाएं दी जाएंगी।

आजीविका से उद्यमिता तक का सफर

इस योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सिर्फ कामकाजी बनाना नहीं बल्कि उन्हें बिजनेस लीडर बनाना है:

  1. क्रेडिट-लिंक्ड सपोर्ट: महिलाओं को बैंकों से जोड़कर उन्हें जरूरी पूंजी (Capital) उपलब्ध कराई जाएगी।

  2. अगला कदम उद्यमिता: जो महिलाएं अब तक केवल आजीविका चला रही थीं उन्हें अब अपना ब्रांड बनाने और उसे बाजार में स्थापित करने के लिए ट्रेनिंग और संसाधन दिए जाएंगे।

  3. तकनीकी मदद: इन मार्ट्स को डिजिटल तकनीक से भी जोड़ा जा सकता है ताकि महिलाएं ऑनलाइन ऑर्डर भी ले सकें।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

  • आत्मनिर्भरता: इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के बीच आर्थिक असमानता कम होगी।

  • स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा: 'लोकल फॉर वोकल' अभियान को मजबूती मिलेगी और क्षेत्रीय कारीगरी को बड़ा मंच मिलेगा।

  • सशक्तीकरण: जब महिलाएं खुद का बिजनेस चलाएंगी तो समाज में उनकी निर्णय लेने की क्षमता और सम्मान बढ़ेगा।

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