Edited By Parveen Kumar,Updated: 14 Mar, 2026 06:00 PM

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कछवा थाना क्षेत्र के जोगीपुरवा गांव में रहने वाला एक किशोर अचानक कुत्ते की तरह आवाज निकालने लगा है। इस अजीब स्थिति से परिवार और आसपास के लोग चिंतित हैं। किशोर के पिता उसे...
नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कछवा थाना क्षेत्र के जोगीपुरवा गांव में रहने वाला एक किशोर अचानक कुत्ते की तरह आवाज निकालने लगा है। इस अजीब स्थिति से परिवार और आसपास के लोग चिंतित हैं। किशोर के पिता उसे ठीक कराने के लिए कभी अस्पताल तो कभी मंदिरों के चक्कर लगा रहे हैं।
चार महीने पहले कुत्ते ने काटा था
जानकारी के मुताबिक जोगीपुरवा गांव निवासी भाईलाल का 17 वर्षीय बेटा करीब चार महीने पहले अपने ननिहाल गया हुआ था। वहीं पर उसे एक कुत्ते ने काट लिया था। घटना के बाद उसे ननिहाल में एंटी-रेबीज का पहला इंजेक्शन लगाया गया। इसके बाद दूसरा इंजेक्शन कछवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लगाया गया, लेकिन परिवार ने आगे के जरूरी इंजेक्शन नहीं लगवाए। बताया जा रहा है कि रेबीज से बचाव के लिए कुल पांच इंजेक्शन की पूरी डोज जरूरी होती है, लेकिन किशोर को केवल दो इंजेक्शन ही लग पाए। परिवार की इसी लापरवाही का परिणाम अब गंभीर रूप में सामने आ रहा है।
व्यवहार में आया बदलाव
कक्षा आठ में पढ़ने वाले इस किशोर के व्यवहार में पिछले कुछ दिनों से अचानक बदलाव देखने को मिला। वह कुत्तों की तरह आवाज निकालने लगा है और उसका चलने-बैठने का तरीका भी असामान्य हो गया है। यह देखकर परिजन और गांव के लोग भी हैरान रह गए।
मंदिर से अस्पताल तक भटक रहे पिता
किशोर के दिव्यांग पिता अपने बेटे को ठीक कराने के लिए कई जगहों पर मदद मांग रहे हैं। वह उसे लेकर कछवा क्षेत्र के जमुआ चौराहे पर स्थित श्री राम-जानकी मंदिर और हनुमान मंदिर तक पहुंचे और भगवान से बेटे के स्वस्थ होने की प्रार्थना करने लगे। इस दौरान कुछ लोगों ने किशोर की हालत देखकर परिवार को तुरंत अस्पताल ले जाने की सलाह दी। इसके बाद एम्बुलेंस बुलाकर उसे कछवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने बताई गंभीर स्थिति
मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज पांडेय के मुताबिक किशोर में जो लक्षण दिखाई दे रहे हैं, वह रेबीज से जुड़ी गंभीर अवस्था हो सकती है। उन्होंने बताया कि जब रेबीज का पूरा टीकाकरण नहीं होता, तो मरीज में हाइड्रोफोबिया जैसे लक्षण विकसित हो सकते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति को पानी से डर लगने लगता है और सांस की नली प्रभावित होने के कारण आवाज में बदलाव आ सकता है।