Edited By Ramkesh,Updated: 31 Aug, 2026 04:27 PM

एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अपने भविष्य के कारोबारी प्लान को लेकर कहा है कि वह स्विट्जरलैंड में इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के साथ काम करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि स्टार्टअप्स में निवेश के लिए वह अपने परिवार से...
नई दिल्ली: एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने अपने भविष्य के कारोबारी प्लान को लेकर कहा है कि वह स्विट्जरलैंड में इन्वेस्टमेंट प्रोफेशनल्स के साथ काम करने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि स्टार्टअप्स में निवेश के लिए वह अपने परिवार से करीब 2 से 4 करोड़ रुपये उधार ले सकते हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (NCLT) ने उनके मामले में करीब ₹22,006.57 करोड़ के क्रेडिटर क्लेम से जुड़ी पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है। योजना के तहत लेनदारों के बीच वितरण के लिए करीब ₹6.5 करोड़ उपलब्ध होंगे।
इस हिसाब से कुल स्वीकृत दावों के मुकाबले लेनदारों की रिकवरी करीब 0.03 प्रतिशत बैठती है, जबकि करीब 99.97 प्रतिशत का हेयरकट बनता है। यानी लेनदारों को उनके दावों की तुलना में बेहद छोटी राशि ही वापस मिल पाएगी। 75 वर्षीय सुभाष चंद्रा ने कहा कि उन्हें अपने कारोबारी सफर को लेकर कोई पछतावा नहीं है। उनका मानना है कि वह अपनी पेशेवर जिंदगी को दोबारा खड़ा कर सकते हैं। चंद्रा का कहना है कि अब उनका ध्यान नए अवसरों और खास तौर पर स्टार्टअप निवेश की ओर है। स्विट्जरलैंड में निवेश से जुड़े पेशेवरों के साथ काम करने की उनकी योजना को उनके कारोबारी जीवन के एक नए चरण के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, चंद्रा ने एक बयान में कहा कि व्यक्तिगत दिवाला कार्यवाही में उनके खिलाफ कुल दावा केवल 3,992 करोड़ रुपये का है। उन्होंने कहा कि इन मामलों में वह केवल व्यक्तिगत गारंटर थे, कर्जदार नहीं। उन्होंने 22,000 करोड़ रुपये के दावे को खारिज किया। तीसरे सदस्य द्वारा पारित आदेश में असहमति जताने वाले कर्जदाताओं की दलील भी दर्ज है। इसमें कहा गया है कि वीणा इन्वेस्टमेंट्स का नियंत्रण सुषिला देवी गोयल के पास बताया जाता है, जो सुभाष चंद्रा के भाई जवाहर गोयल की पत्नी हैं। वहीं, डायरेक्ट मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन वेंचर्स और वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर्स इसकी अनुषंगी कंपनियां हैं। इन संस्थाओं के सुभाष चंद्रा के खिलाफ दावे क्षतिपूर्ति पत्रों और गारंटी दस्तावेजों पर आधारित थे, जो कथित तौर पर चंद्रा ने उनके पक्ष में जारी किए थे।
ये दस्तावेज इंडसइंड बैंक द्वारा समूह की एक अन्य कंपनी स्पिरिट टेक्सटाइल्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई ऋण सुविधाओं से जुड़े गिरवी रखे गए समूह के शेयरों से संबंधित थे। इसके अलावा, एनसीएलटी के आदेश में कहा गया है कि लेमोनेड कैपिटल एडवाइजर्स एलएलपी और कॉर्पकॉल कैपिटल एडवाइजर्स एलएलपी के दावे कथित तौर पर व्यक्तिगत गारंटर सुभाष चंद्रा द्वारा दी गई गारंटी पर आधारित हैं। ये गारंटी समूह की एक अन्य कंपनी चूरू एंटरप्राइजेज एलएलपी द्वारा ली गई वित्तीय सुविधाओं के संबंध में दी गई थीं। आदेश में यह भी दर्ज है कि इन संस्थाओं और व्यक्तिगत गारंटर सुभाष चंद्रा के बीच नजदीकी संबंध की पुष्टि इस तथ्य से होती है कि इन दोनों संस्थाओं के साझेदार उन कंपनियों के निदेशक भी हैं, जिन्हें वित्त वर्ष 2020-21 के लिए वीणा इन्वेस्टमेंट्स के एकीकृत वित्तीय विवरणों में 'अन्य संबंधित पक्ष' के रूप में बताया गया है।