Tata के ग्राहकों को बड़ा झटका, 1 दिसंबर से 25,000 रुपए तक महंगी होंगी कंपनी की गाड़ियां

Edited By Updated: 21 Aug, 2026 11:25 AM

tata vehicles to become costlier by up to 25 000 from december 1

टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड 1 सितंबर से अपनी कारों और SUVs (ICE और EV दोनों) की कीमतें 25,000 रुपये तक बढ़ाएगी। कंपनी ने इसके लिए बढ़ती इनपुट लागत और लगातार महंगाई के दबाव का हवाला दिया है। कंपनी ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और...

Tata Cars Price Hike: टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स लिमिटेड 1 सितंबर से अपनी कारों और SUVs (ICE और EV दोनों) की कीमतें 25,000 रुपये तक बढ़ाएगी। कंपनी ने इसके लिए बढ़ती इनपुट लागत और लगातार महंगाई के दबाव का हवाला दिया है। कंपनी ने कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी, क्योंकि वह लागत में बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा खुद झेलते हुए बाकी का बोझ ग्राहकों पर डालना चाहती है।

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टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने शुक्रवार को एक्सचेंज फाइलिंग में कहा, "कीमतों में यह बदलाव बढ़ती इनपुट लागत और लगातार महंगाई के असर को कुछ हद तक कम करने के लिए किया जा रहा है।" कंपनी ने कहा कि यह बढ़ोतरी उसकी कारों और SUVs के पूरे पोर्टफोलियो पर लागू होगी, लेकिन बढ़ोतरी की सही मात्रा अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट के हिसाब से अलग-अलग होगी। कंपनी ने कहा, "हालांकि TMPV लागत में हुई इस बढ़ोतरी का एक बड़ा हिस्सा खुद झेल रही है, लेकिन इस बदलाव के जरिए इसका कुछ असर ग्राहकों पर भी डाला जा रहा है।"

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कंपनी ने आगे कहा कि अलग-अलग मॉडल और वेरिएंट की कीमतों में बदलाव करते समय वह अपनी गाड़ियों की कुल वैल्यू बनाए रखेगी। यह कदम हुंडई मोटर्स की उस घोषणा के एक दिन बाद उठाया गया है जिसमें उसने कहा था कि वह सितंबर से अपने पोर्टफोलियो में गाड़ियों की कीमतें 1 प्रतिशत तक बढ़ाएगी। हुंडई ने इसके लिए इनपुट और कमोडिटी की बढ़ती लागत, ज़्यादा ऑपरेशनल खर्च और लगातार भू-राजनीतिक और मैक्रो-इकोनॉमिक अनिश्चितताओं का हवाला दिया था। टाटा मोटर्स का यह नया कदम पारंपरिक और इलेक्ट्रिक दोनों तरह की गाड़ियों पर लागू होता है, जिससे कीमतों में बदलाव उसके पैसेंजर व्हीकल पोर्टफोलियो के सभी मॉडलों पर लागू होगा।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ऑटो सेक्टर लगातार कमोडिटी की लागत के दबाव का सामना कर रहा है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने हाल ही में एक रिपोर्ट में कहा था कि मांग की रफ्तार स्थिर रहने की उम्मीद है, लेकिन कमोडिटी की लगातार बढ़ती लागत और ग्लोबल ऑटो मार्केट में कमजोरी मार्जिन पर असर डाल सकती है।


ब्रोकरेज ने कहा कि ऑटो ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स (OEMs) ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में वॉल्यूम में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की, लेकिन कमोडिटी की ज़्यादा लागत ने EBITDA की बढ़ोतरी को सीमित कर दिया। हालांकि कच्चे तेल, एल्युमीनियम और कीमती धातुओं की कीमतें पहली तिमाही के उच्चतम स्तर से नीचे आई हैं, जिससे मार्जिन को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन घरेलू स्टील की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

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