दुष्कर्म-हत्या मामले में CJI ने डॉक्टर को लगाई फटकार, कहा- फर्ज नहीं निभा सकते तो 'डॉक्टर' मत लिखिए

Edited By Updated: 17 Jul, 2026 06:25 PM

the cji reprimanded the doctor in the rape murder case saying  if you can t pe

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दो निजी अस्पतालों और उनके चिकित्सकों को फटकार लगाई। इन अस्पतालों ने मार्च में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दुष्कर्म की शिकार चार साल की बच्ची को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं दी थी, बाद में बच्ची की मौत हो गयी। भारत के...

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को दो निजी अस्पतालों और उनके चिकित्सकों को फटकार लगाई। इन अस्पतालों ने मार्च में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में दुष्कर्म की शिकार चार साल की बच्ची को समय पर चिकित्सा सहायता नहीं दी थी, बाद में बच्ची की मौत हो गयी। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने अस्पतालों से परिवार को उचित मुआवजा देने को कहा।

आप ने नजरअंदाज किया, क्योंकि वह गरीब थी?
सीजेआई ने चिकित्सकों से कहा, "अगर आप अपना फर्ज नहीं निभाते, तो आपको 'डॉक्टर' कहलाने का कोई हक नहीं है। अगर आपमें थोड़ी भी संवेदनशीलता होती, आपके पास सुविधा नहीं थी, तो आप उस बच्चे को दूसरे अस्पताल ले जाते... क्या आपने इसलिए नजरअंदाज किया, क्योंकि वह गरीब थी? आपकी फीस नहीं दे सकती थी?" इस मामले में अगले हफ्ते फिर सुनवाई होगी।

नाबालिग रेप पीड़िता को अस्पताल में नहीं किया था भर्ती 
कथित तौर पर एक पड़ोसी 16 मार्च को पीड़िता को चॉकलेट दिलाने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। जब बच्ची वापस नहीं लौटी, तो उसके पिता ने उसे खोजना शुरू किया और उसे बेहोश तथा खून से लथपथ हालत में पाया। परिवार उसे दो निजी अस्पतालों में ले गया, जहां कथित तौर पर उसे भर्ती करने से मना कर दिया गया। उसे गाजियाबाद के एक सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने केस दर्ज कर जांच के दिए थे आदेश 
न्यायालय ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने और जांच को लेकर गाजियाबाद पुलिस की "हिचकिचाहट" की ओर अप्रैल में इशारा किया था। उसने कथित तौर पर पीड़िता का इलाज करने से मना करने वाले दो निजी अस्पतालों -खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर और सेंट जोसेफ (मरियम) हॉस्पिटल- को भी निर्देश दिया था कि वे उनपर लगे आरोपों के जवाब में अपने हलफनामे दाखिल करें।

संबंधित पुलिस थाना थानाध्यक्ष के संवेदनहीन रवैये से नाराज हुए CJI 
पीठ पीड़िता के पिता की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो दिहाड़ी मजदूर हैं और चाहते हैं कि इस मामले की जांच अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) या सीबीआई करे। न्यायालय ने 10 अप्रैल को मामले की सुनवाई करते हुए जांच में गाजियाबाद पुलिस के "संवेदनहीन रवैये" की कड़ी आलोचना की थी। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार, संबंधित पुलिस थाने के थानाध्यक्ष (एसएचओ), दो अस्पतालों और कार्यकारी मजिस्ट्रेट को नोटिस जारी किए थे।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश पीड़ित परिवार की पहचान न हो उजागर 
न्यायालय ने पुलिस और अस्पतालों को निर्देश दिया था कि वे यह सुनिश्चित करें कि पीड़िता और उसके परिवार के सदस्यों की पहचान उजागर न हो और उनके रिकॉर्ड से ऐसी कोई भी जानकारी हटा दी जाए। पीठ ने राज्य पुलिस से यह भी कहा था कि वे पीड़िता के परिवार के सदस्यों को परेशान न करें। न्यायालय ने इस बात पर निराशा जताई थी कि दो निजी अस्पतालों ने खून से लथपथ लड़की को भर्ती करने से मना कर दिया था और आखिरकार एक सरकारी अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। 

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