Women's Reservation Bill : OBC महिलाओं के लिए आखिर नीतीश कुमार क्यों मांगा था अलग कोटा? जानिए इसके पीछे का पूरा सच

Edited By Updated: 03 Feb, 2026 12:21 PM

the history of obc quota within women s reservation bill

राजनीति के गलियारों में नीतीश कुमार को अक्सर 'सोशल इंजीनियरिंग' का उस्ताद माना जाता है। इसकी नींव उन्होंने आज से तीन दशक पहले ही रख दी थी। साल 1996 में, जब देश में महिला आरक्षण विधेयक (81वां संविधान संशोधन) पहली बार पेश हुआ, तब समता पार्टी के सांसद...

नेशनल डेस्क : राजनीति के गलियारों में नीतीश कुमार को अक्सर 'सोशल इंजीनियरिंग' का उस्ताद माना जाता है। इसकी नींव उन्होंने आज से तीन दशक पहले ही रख दी थी। साल 1996 में, जब देश में महिला आरक्षण विधेयक (81वां संविधान संशोधन) पहली बार पेश हुआ, तब समता पार्टी के सांसद के रूप में नीतीश कुमार ने एक ऐसा भाषण दिया था जो आज भी उचित है।

नीतीश की तल्खी: 'हमें महिला विरोधी न समझा जाए'

उस दौर में नीतीश कुमार इस बात से बेहद आहत थे कि पिछड़ों के हक की बात करने वालों को 'महिला आरक्षण विरोधी' करार दिया जा रहा था। उन्होंने सदन में दो टूक कहा था, "हम महिलाओं को आरक्षण देने के विरोधी नहीं हैं, हम तो बस यह चाहते हैं कि पिछड़े वर्ग की महिलाओं का स्थान भी इसमें सुरक्षित हो।" उनका तर्क था कि बिना 'कोटा के अंदर कोटा' के, ग्रामीण और पिछड़ी महिलाएं कभी मुख्यधारा की राजनीति में नहीं आ पाएंगी।

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गीता मुखर्जी समिति और नीतीश का सुझाव

12 सितंबर 1996 को एच.डी. देवेगौड़ा सरकार द्वारा पेश इस बिल को भारी विरोध के बाद गीता मुखर्जी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा गया था। नीतीश कुमार इस समिति के 31 सदस्यों में से एक थे। समिति में उन्होंने स्पष्ट सुझाव दिया कि एक तिहाई (33%) आरक्षण के भीतर ओबीसी महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि आरक्षण का लाभ केवल प्रभुत्वशाली वर्ग की महिलाओं तक ही सीमित न रहे।

'खूंटा यहीं गाड़ेंगे': वो चर्चित मुहावरा

अपने भाषण के दौरान नीतीश कुमार ने एक ग्रामीण मुहावरे का जिक्र करते हुए कहा था, "पंच का फैसला मानेंगे, लेकिन खूंटा यहीं गाड़ेंगे"। उनके कहने का अर्थ यह था कि सरकार आम सहमति बनाने का दिखावा तो कर रही है, लेकिन असलियत में वह ओबीसी महिलाओं को नजरअंदाज करने की अपनी जिद पर अड़ी हुई है।

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मंडल की आग का दिया था हवाला

नीतीश ने चेतावनी भरे लहजे में मंडल कमीशन के समय हुए राष्ट्रव्यापी बवाल का भी जिक्र किया था। उन्होंने सवाल उठाया था कि यदि आज ओबीसी महिलाओं को हक नहीं दिया गया और भविष्य में इसके लिए अलग से मांग उठी, तो क्या देश फिर से वैसी ही अस्थिरता झेलेगा? उन्होंने 'धोखे' में न आने की बात कहते हुए मांग की थी कि आरक्षण में ओबीसी कोटा अभी और इसी वक्त शामिल किया जाए।

 

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