'पंजाब केसरी के खिलाफ मान सरकार की धक्काशाही', प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने की कड़ी निंदा

Edited By Updated: 17 Jan, 2026 08:41 PM

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पत्रकारों की सबसे बड़ी संस्था प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने पंजाब सरकार द्वारा 'पंजाब केसरी' न्यूज़पेपर ग्रुप को कथित तौर पर परेशान करने और डराने-धमकाने की कड़ी निंदा की है। पत्रकारों की इस सबसे बड़ी संस्था ने सरकार की इन हरकतों को बहुत परेशान करने वाला...

नेशनल डेस्क: पत्रकारों की सबसे बड़ी संस्था प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया ने पंजाब सरकार द्वारा 'पंजाब केसरी' न्यूज़पेपर ग्रुप को कथित तौर पर परेशान करने और डराने-धमकाने की कड़ी निंदा की है। पत्रकारों की इस सबसे बड़ी संस्था ने सरकार की इन हरकतों को बहुत परेशान करने वाला और शर्मनाक बताया है।

इस बारे में एक लेटर जारी करते हुए प्रेस क्लब ने कहा कि पंजाब सरकार के अलग-अलग डिपार्टमेंट न्यूज़पेपर बिज़नेस को टारगेट कर रहे हैं। न्यूज़पेपर के जालंधर (सूरानुसी), लुधियाना और बठिंडा में मौजूद प्रेस पर भारी पुलिस फोर्स तैनात की गई है, जिससे न्यूज़पेपर की प्रिंटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन में रुकावट आने का डर है।

क्लब ने 15 जनवरी, 2026 को मुख्यमंत्री को लिखे एक लेटर का हवाला देते हुए कहा कि न्यूज़पेपर को उसकी एडिटोरियल आज़ादी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग की वजह से टारगेट किया जा रहा है। संस्था ने साफ़ किया कि प्रेस को इस तरह डराना-धमकाना 'पुलिस राज' की निशानी है, न कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार की।

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संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन

बयान में कहा गया है कि अखबार की छपाई या सर्कुलेशन को रोकने की कोशिश संविधान के आर्टिकल 19(1)(A) के तहत बोलने की आज़ादी के बुनियादी अधिकार का गंभीर उल्लंघन है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फैसलों जैसे 'रोमेश थापर बनाम मद्रास राज्य (1950)' का हवाला दिया गया है, जिसके अनुसार अखबार का प्रकाशन रोकना गैर-कानूनी और गैर-संवैधानिक है।

माननीय सरकार को कड़ी चेतावनी

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने पंजाब सरकार से अपील की है कि कानून को लागू करने की प्रक्रिया में प्रेस की आज़ादी के खिलाफ तरह-तरह के हथकंडे न अपनाए जाएं। उन्होंने कहा कि अगर अखबार मालिकों के दूसरे धंधों में कोई कानूनी उल्लंघन होता है, तो उसकी जांच की जा सकती है, लेकिन इस आड़ में अखबार का प्रकाशन रोकना लोकतंत्र के खिलाफ है।

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