'आप कितने भी बड़े हो, हम सीधा कर देंगे'...राहुल गांधी ने पंजाब कांग्रेस नेताओं की लगाई क्लास

Edited By Updated: 04 Mar, 2026 04:59 PM

why did rahul gandhi s tough stance put punjab leaders in a class

पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी की तैयारी में जुट गई है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में आपसी गुटबाजी के कारण मिली हार से सबक लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में समय रहते संगठन को एकजुट करने की कोशिश शुरू...

नेशनल डेस्क: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और कांग्रेस पार्टी सत्ता में वापसी की तैयारी में जुट गई है। हरियाणा विधानसभा चुनाव में आपसी गुटबाजी के कारण मिली हार से सबक लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने पंजाब में समय रहते संगठन को एकजुट करने की कोशिश शुरू कर दी है। इसी कड़ी में कांग्रेस सांसद Rahul Gandhi ने पार्टी नेताओं को साफ संदेश दिया है कि अब आपसी खींचतान बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

शनिवार को बरनाला में आयोजित मनरेगा मजदूर किसान बचाओ महारैली में राहुल गांधी ने मंच से ही पंजाब कांग्रेस नेताओं को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि चुनाव टीम वर्क से जीते जाते हैं, किसी एक नेता के दम पर नहीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो नेता टीम प्लेयर की तरह काम नहीं करेगा, उसे ‘रिजर्व बेंच’ पर बैठा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी से बड़ा कोई नहीं है और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

राहुल गांधी ने यह भी संकेत दिया कि यदि कोई नेता गुटबाजी से बाज नहीं आता, तो उसे पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने में भी देर नहीं की जाएगी। उनके साथ कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge का भी कड़ा रुख बताया जा रहा है।

क्यों देना पड़ा सख्त संदेश
पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। कई वरिष्ठ नेताओं के बीच खींचतान खुलकर सामने आई थी। पार्टी हाईकमान को कई बार प्रदेश नेताओं को दिल्ली बुलाकर समझाना पड़ा, लेकिन हालात में खास सुधार नहीं हुआ। हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 13 में से 7 सीटें जीतकर अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन संगठनात्मक एकजुटता की कमी लगातार बनी रही। लुधियाना पश्चिमी उपचुनाव में यह गुटबाजी फिर खुलकर सामने आई, जहां कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों का असर नतीजों पर पड़ा।


नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई
पंजाब कांग्रेस में कई धड़े सक्रिय हैं। प्रदेश अध्यक्ष Amarinder Singh Raja Warring, विपक्ष के नेता Partap Singh Bajwa और सांसद Sukhjinder Singh Randhawa एक खेमे में माने जाते हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री Charanjit Singh Channi, राणा गुरजीत सिंह, परगट सिंह और भारत भूषण आशू जैसे नेता दूसरे गुट से जुड़े बताए जाते हैं।

प्रदेश स्तर पर अलग-अलग नेताओं के अपने-अपने समर्थक और प्रभाव क्षेत्र हैं। हाल ही में एक गुट ने विधायकों और पूर्व उम्मीदवारों से हस्ताक्षर करवाकर एक अभियान चलाया, जिसे चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थन से जोड़कर देखा गया। चन्नी के एक बयान, जिसमें उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने की बात कही थी, पर भी पार्टी के अंदर विवाद खड़ा हो गया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने वरिष्ठ नेताओं को दिल्ली बुलाकर फटकार लगाई थी।

चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने की कोशिश
अब जबकि विधानसभा चुनाव में करीब एक साल का समय बचा है, कांग्रेस नेतृत्व चाहता है कि पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतरे। राहुल गांधी का सार्वजनिक मंच से दिया गया सख्त संदेश इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर कांग्रेस को पंजाब में वापसी करनी है तो उसे आंतरिक मतभेद खत्म कर मजबूत संगठनात्मक ढांचा खड़ा करना होगा। आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि राहुल गांधी की चेतावनी का प्रदेश नेतृत्व पर कितना असर पड़ता है।

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