ईरान का समुद्र में प्रहारः ‘सेफसी विष्णु’ पर अटैक में भारतीय की मौत, कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले में मारे गए 6 अमेरिकी सैनिक

Edited By Updated: 12 Mar, 2026 11:50 AM

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इराक के पास अमेरिकी स्वामित्व वाले तेल टैंकर पर कथित ईरानी आत्मघाती नौका हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। वहीं कुवैत में ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई गंभीर रूप से घायल हुए। इससे मध्य-पूर्व में अमेरिका-ईरान तनाव और बढ़...

International Desk: इराक के जलक्षेत्र में खोर अल जुबैर बंदरगाह के पास एक अमेरिकी स्वामित्व वाले तेल टैंकर Seafcy Vishnu oil tanker पर कथित रूप से ईरान की एक आत्मघाती नौका ने हमला कर दिया। इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत होने की सूचना है, हालांकि अभी तक मृतक का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। सूत्रों ने बताया कि जहाज पर सवार कुल 27 चालक दल के सदस्य और कर्मचारी सुरक्षित बचा लिए गए और उन्हें इराक के शहर Basra ले जाया गया।

 

 जहाज के बारे में अहम जानकारी
यह जहाज Marshall Islands के झंडे के तहत संचालित होता है और अमेरिकी स्वामित्व वाली कंपनी से जुड़ा बताया जा रहा है।जहाज की लंबाई: 228.6 मीटर

  • चौड़ाई: 32.57 मीटर
  • निर्माण वर्ष: 2007
  • सकल टन भार: 42010 टन
  • डेडवेट टन भार (DWT): 73,976 टन

 

भारतीय नाविकों को लेकर बढ़ी चिंता
समुद्री क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का कहना है कि दुनिया भर के नाविकों में 15% से अधिक भारतीय नागरिक हैं। इसलिए जब भी किसी जहाज को निशाना बनाया जाता है, तो भारतीय नाविक अप्रत्यक्ष रूप से जोखिम में आ जाते हैं।  कंपनी ने भारत सरकार से हमले की कड़ी निंदा करने और पश्चिम एशिया में जहाजों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।

 

 कुवैत में  अमेरिकी सैनिकों को भारी नुकसान
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के शुरुआती घंटों में Iran ने Kuwait में एक सैन्य ठिकाने पर ड्रोन हमला किया। इस हमले में 6 अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई दर्जन  घायल हो गए।  कुछ सैनिकों को ब्रेन ट्रॉमा, जलने और छर्रे लगने जैसी गंभीर चोटें आईं। रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला पहले बताई गई जानकारी से कहीं ज्यादा गंभीर था।

 

मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र में जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले, सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना, ये सभी संकेत देते हैं कि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव तेजी से युद्ध की दिशा में बढ़ सकता है। इसका असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
 

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