Edited By Tanuja,Updated: 11 Mar, 2026 01:32 PM

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सत्र के दौरान ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की दो छात्राओं ने भारत की समावेशी शिक्षा प्रणाली की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत में शिक्षा में अकादमिक पढ़ाई के साथ व्यावसायिक कौशल, तकनीक और सामाजिक विकास पर जोर दिया...
International Desk: संयुक्त राष्ट्र के मंच पर भारत की शिक्षा व्यवस्था को लेकर सकारात्मक चर्चा सामने आई है। United Nations Human Rights Council (UNHRC) के 61वें सत्र के दौरान University of Oxford की दो छात्राओं ने भारत की समावेशी और व्यावहारिक शिक्षा प्रणाली की खुलकर सराहना की। ऑक्सफोर्ड की छात्रा Zoe Barclay ने बातचीत में कहा कि भारत के युवा अक्सर बहुत महत्वाकांक्षी और मेहनती होते हैं, क्योंकि उन्हें अवसर आसानी से नहीं मिलते। उनके अनुसार यही स्थिति छात्रों को रचनात्मक सोचने और नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करती है। बार्कले ने कहा कि शिक्षा में केवल अकादमिक पढ़ाई ही नहीं, बल्कि व्यावसायिक कौशल भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ईगीरी, सिलाई और अन्य तकनीकी कार्यों को भी व्हाइट-कॉलर नौकरियों जितना सम्मान मिलना चाहिए। उनके अनुसार पश्चिमी देशों, खासकर United Kingdom, को इस संतुलित मॉडल से सीख लेनी चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पर Mahatma Gandhi के विचारों का प्रभाव दिखाई देता है। इस सोच में शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास, जीवन कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना भी है। दोनों छात्राओं ने Akshar Foundation के काम की विशेष रूप से सराहना की, जो Assam में शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही है। यह संस्था National Education Policy 2020 के कुछ सिद्धांतों को लागू करती है, जिसमें पीयर लर्निंग, मेंटरशिप और क्षमता के आधार पर कक्षा निर्धारण शामिल है। इस मॉडल में बड़े छात्र छोटे छात्रों को पढ़ाते हैं, जिससे न केवल पढ़ाई में मदद मिलती है बल्कि संवाद, सहानुभूति और नेतृत्व जैसे कौशल भी विकसित होते हैं।
इससे शिक्षकों पर दबाव भी कम होता है और छात्रों के बीच सहयोग की भावना बढ़ती है। फाउंडेशन उन बच्चों को भी शिक्षा से जोड़ने पर ध्यान देता है जो पहले बाल श्रम या कम उम्र में शादी जैसी समस्याओं से प्रभावित रहे हैं। छात्रों को अपनी गति से आगे बढ़ने की सुविधा देकर शिक्षा की बाधाओं को कम करने की कोशिश की जाती है। ऑक्सफोर्ड की मेडिकल छात्रा Petrina Lander ने कहा कि भविष्य के करियर के लिए शिक्षा में डिजिटल तकनीक और टेक्नोलॉजी कौशल को शामिल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि असम में अक्षर फाउंडेशन के साथ काम करते हुए उन्होंने देखा कि समग्र शिक्षा कैसे कमजोर और गरीब बच्चों के जीवन को बदल सकती है।