Edited By Ramkesh,Updated: 19 May, 2026 06:42 PM

महाराष्ट्र में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि “बुलडोजर कल्चर को महाराष्ट्र में घुसने मत दीजिए, यह उत्तर प्रदेश या बिहार नहीं है।” कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक...
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि “बुलडोजर कल्चर को महाराष्ट्र में घुसने मत दीजिए, यह उत्तर प्रदेश या बिहार नहीं है।” कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए कि किसी भी कार्रवाई में कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन जरूरी है।
जानिए पूरा मामला
दरअसल, मामला छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम से जुड़ा था। बॉम्बे हाई कोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने सोमवार को नगर निगम की आलोचना करते हुए कहा कि उसने AIMIM पार्षद मतीन पटेल और हनीफ खान से जुड़ी संपत्तियों को मनमाने ढंग से, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए गिरा दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं किया गया पालन
जस्टिस सिद्धेश्वर टी. की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए, 13 मई को किए तोड़फोड़ पर कड़ी मौखिक टिप्पणियां की। कोर्ट ने कहा कि इसमें अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन नहीं किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए 15 दिन की नोटिस अवधि निर्धारित की है। बेंच ने कहा, 'अंतिम नोटिस का कोई पालन नहीं किया गया। इस कार्रवाई ने पूरे परिवार को बेघर कर दिया है। कोर्ट ने आगे यह भी सवाल उठाया कि क्या छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम ने इमारतों को गिराने से पहले उनके विशिष्ट अवैध हिस्सों की पहचान की थी। कोर्ट ने साफ कहा कि अधिकारियों को यह जांच करनी चाहिए थी कि घर का कौन सा हिस्सा अवैध था।
सरकारी वकील ने दिए ये तर्क
नगर निगम की ओर से पेश सरकारी वकील संभाजी टोपे ने तर्क दिया था कि याचिकाएं अब बेमानी हो गई हैं क्योंकि इमारतें पहले ही गिराई जा चुकी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता निचली अदालत में दीवानी उपचार की मांग करें। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी।