मानसून पर बड़ी भविष्यवाणी: इस साल गर्मी तोड़ेगी 100 साल का रिकॉर्ड, EL Nino बिगाड़ेगा बारिश का खेल

Edited By Updated: 14 Mar, 2026 01:01 PM

this year s heat to break 100 year record el niño to disrupt rainfall patterns

भारत में मार्च के महीने में ही गर्मी अपने चरम पर पहुँच रही है। राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है।

नेशनल डेस्क: भारत में मार्च के महीने में ही गर्मी अपने चरम पर पहुँच रही है। राजधानी दिल्ली में अधिकतम तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में तापमान मार्च में ही 40 डिग्री तक पहुँचने लगा है।

अल नीनो की गतिविधि बढ़ रही
यूरोपीय सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स के मौसम विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो सक्रिय हो गया है और समय के साथ यह काफी मजबूत होने की संभावना है। इस मौसमी बदलाव का सबसे अधिक असर भारत में गर्मी की तीव्रता और मानसून के पैटर्न पर देखने को मिल सकता है।


भीषण और रिकॉर्ड तोड़ने वाली गर्मी का अनुमान
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार अल नीनो के कारण भारत में गर्मी सामान्य से कहीं अधिक और रिकॉर्ड तोड़ने वाली हो सकती है। साथ ही कमजोर मानसून की वजह से कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। जून से अगस्त के बीच अल नीनो के और सक्रिय होने की 60 प्रतिशत संभावना है और साल के अंत तक यह अपने चरम पर पहुँच सकता है।


मानसून पर अल नीनो का असर
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्र प्रशांत महासागर पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। अल नीनो सक्रिय होने पर वैश्विक मौसम प्रणाली प्रभावित होती है, जिसमें भारतीय मानसून भी शामिल है। खासकर वर्षा ऋतु का दूसरा भाग, यानी अगस्त-सितंबर के बीच, सबसे अधिक प्रभावित होने की संभावना है।

अल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से की सतह गर्म हो जाती है। इससे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आने वाली नमी वाली हवाओं की गति कमजोर हो जाती है, जिससे मानसून की वर्षा प्रभावित हो सकती है।

गर्म हवाओं और नमी की कमी का असर
अल नीनो की सक्रियता के कारण हवा में नमी कम हो जाती है। इससे मानसून कमजोर या बाधित हो सकता है। प्रशांत महासागर के एक हिस्से में समुद्री तूफान और भारी बारिश होती है, वहीं दूसरे हिस्से में लू चलती है और सूखे की स्थिति बनती है। चूंकि प्रशांत महासागर पूरी दुनिया के मौसम और तापमान को प्रभावित करता है, इसलिए इसका असर भारत समेत कई देशों में भीषण गर्मी और कमजोर मानसून के रूप में दिख सकता है।


क्या भारत में सूखा पड़ सकता है?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव से मानसून कमजोर हो सकता है, लेकिन इसका निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता। पिछले कुछ वर्षों में अल नीनो सक्रिय होने के बावजूद भी भारत में सामान्य मानसून देखने को मिला है। फिर भी अगर अल नीनो शुरुआत में ही मजबूत हो गया, तो बारिश सामान्य से कम हो सकती है। चूंकि पूरे साल की 70 प्रतिशत बारिश मानसून के दौरान होती है, इसलिए कम बारिश कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।


वैज्ञानिकों की चेतावनी
वैज्ञानिकों का सुझाव है कि इस गर्मी में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। अल नीनो के प्रभाव के कारण तापमान में वृद्धि, सूखा और मानसून की अनिश्चितता सभी मिलकर कृषि, जल आपूर्ति और ऊर्जा उपयोग पर असर डाल सकते हैं। लोगों को पर्याप्त पानी पीने, तेज धूप में कम समय रहने और खेती में मौसम के अनुसार तैयारी करने की सलाह दी जा रही है।

 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!