Edited By Anu Malhotra,Updated: 14 Mar, 2026 03:23 PM

भारत के टैक्स इतिहास में 1 अप्रैल 2026 की तारीख एक बड़े बदलाव की गवाह बनने जा रही है। सरकार ने दशकों पुराने नियमों को पीछे छोड़ते हुए नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू करने का फैसला किया है। यह बदलाव केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके शेयर बाजार...
नेशनल डेस्क: भारत के टैक्स इतिहास में 1 अप्रैल 2026 की तारीख एक बड़े बदलाव की गवाह बनने जा रही है। सरकार ने दशकों पुराने नियमों को पीछे छोड़ते हुए नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 लागू करने का फैसला किया है। यह बदलाव केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके शेयर बाजार के मुनाफे से लेकर विदेश में बच्चों की पढ़ाई के लिए भेजे जाने वाले पैसों तक, हर जगह अपना असर दिखाएगा। हालांकि आम आदमी के लिए राहत की बात यह है कि टैक्स स्लैब में कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, लेकिन रिटर्न फाइल करने की समय सीमा और कुछ खास शुल्कों में काफी फेरबदल हुआ है।
बिजनेस करने वालों को मिली थोड़ी और मोहलत
अगर आप व्यापारी हैं और ITR-3 या ITR-4 के दायरे में आते हैं, तो अब आपको अपनी इनकम का हिसाब देने के लिए हड़बड़ी करने की जरूरत नहीं होगी। सरकार ने बिना ऑडिट वाले इन टैक्सपेयर्स के लिए डेडलाइन को 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया है। यानी अब आपके पास अपना बही-खाता दुरुस्त करने के लिए एक महीना अतिरिक्त होगा। हालांकि, नौकरीपेशा लोगों (ITR-1 और 2) के लिए 31 जुलाई की तारीख ही बरकरार रहेगी।
गलती सुधारने के लिए अब पूरा साल मिलेगा
रिटर्न भरते समय अगर कोई चूक हो जाए, तो उसे सुधारने यानी 'रिवाइज्ड रिटर्न' भरने का मौका अब 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक मिलेगा। यानी जिस वित्तीय वर्ष का टैक्स है, उसके खत्म होने तक आप सुधार कर सकते हैं। बस ध्यान यह रखना होगा कि 31 दिसंबर के बाद अगर आप बदलाव करते हैं, तो जेब से एक्स्ट्रा फीस देनी पड़ सकती है।
विदेशी खर्चों पर TCS का बोझ हुआ कम
विदेशों में पैसा भेजने (LRS) वालों के लिए सरकार ने टैक्स कलेक्शन एट सोर्स (TCS) के पेचीदा नियमों को आसान बना दिया है। पहले जहां अलग-अलग मामलों में 5% से 20% तक टैक्स कटता था, अब उसे एक समान 2% कर दिया गया है। चाहे आप विदेश में इलाज के लिए पैसे भेजें या बच्चों की पढ़ाई के लिए, अब टैक्स की दर कम और सरल होगी। इससे रिफंड के चक्कर में फंसी रहने वाली आपकी बड़ी रकम अब आपके पास ही बचेगी।
शेयर बाजार के खिलाड़ियों के लिए बढ़ी चुनौती
डेरिवेटिव्स यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में किस्मत आजमाने वाले ट्रेडर्स के लिए यह बजट थोड़ा कड़वा साबित हो सकता है। सरकार ने सिक्योरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) में इजाफा कर दिया है। फ्यूचर्स पर लगने वाला टैक्स अब 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15% होगा। इसका सीधा मतलब है कि अब हर ट्रेड पर आपकी लागत बढ़ जाएगी।
बायबैक और डिविडेंड के नियमों में फेरबदल
शेयर मार्केट के निवेशकों के लिए एक और जरूरी बदलाव बायबैक को लेकर है। अब कंपनियों द्वारा शेयर वापस खरीदने पर मिलने वाली रकम को 'कैपिटल गेन' माना जाएगा और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा। इसके अलावा, अगर आप डिविडेंड से कमाई करते हैं और उस निवेश के लिए आपने कोई कर्ज लिया था, तो अब आप उस ब्याज पर टैक्स छूट का दावा नहीं कर पाएंगे। अब पूरे डिविडेंड पर आपकी इनकम के हिसाब से टैक्स देना होगा।
शराब और कबाड़ के कारोबार पर नई दरें
TCS की दरों में केवल कमी ही नहीं हुई है, कुछ क्षेत्रों में इसे बढ़ाया भी गया है। शराब, कबाड़ (Scrap) और खनिज उत्पादों की बिक्री पर अब टैक्स की दर 1% से बढ़कर 2% हो जाएगी। वहीं, तेंदू पत्ता कारोबारियों को राहत देते हुए इस पर लगने वाले टैक्स को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।