Bengal Assembly Elections: भाजपा-तृणमूल में 76 सीटों पर कड़ी टक्कर, SIR और महिला आरक्षण मुद्दों पर भाजपा TM आमने- सामने

Edited By Updated: 21 Apr, 2026 01:26 PM

tough competition between bjp and trinamool in 76 seats bjp and tm face off on

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का प्रचार अब अंतिम चरण में हैं। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगा रही है, लेकिन बंगाल कुछ ऐसी सीटें हैं जहां पर BJP-TMC में कड़ी टक्कर हो सकती है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो उत्तर...

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण का प्रचार अब अंतिम चरण में हैं। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगा रही है, लेकिन बंगाल कुछ ऐसी सीटें हैं जहां पर BJP-TMC में कड़ी टक्कर हो सकती है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो उत्तर दिनाजपुर, अलीपुरद्वार, साउथ दिनाजपुर, दार्जिलिंग, मुर्शिदाबाद, मालदा, न्यू जलपाईगुड़ी सहित कई सीटें हैं। जहां पर दोनो पार्टियां में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है।

हांलांकि बंगाल विधान चुनाव में बीजेपी ने अपने सभी स्टार प्रचारक को मैदान में उतारा है। चाय बागानों के साढ़े तीन लाख परिवारों को भूमि का मालिकाना हक का पट्टा, एसआइआर समेत अन्य सत्ता परिवर्तन जैसे कई मुद्दे को लेकर ममता सरकार को कटघरे में खड़ा कर जनता भाजपा के पक्ष में मतदान की कोशिश की है। लेकिन ममता ने अपनी पूरी के साथ एसआइआर और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे को लेकर सत्ता विरोध की लहर को कम कर दिया है।

SIR की प्रक्रिया सत्ता परिवर्तन की लहर को कर सकता है कम
बंगाल की राजनीति पर करीब से नजर रखने वाले सेवानिवृत्त प्रो. उदयन बंदोपाध्याय ने कहा कि भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है और इसमें किसी भी दल को फायदा मिल सकता है। एसआइआर के दौरान काफी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, जिसका बड़े पैमाने पर विरोध है। इसका फायदा ममता सरकार को मिल सकता है।

पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को होगा मतदान
आप को बता दें कि पहले चरण में 152 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान। महिला आरक्षण सहित अन्य मुद्दों पर भाजपा तृणमूल कांग्रेस पर हमलावर है। मतदाताओं के नाम काटे जाने का भारी विरोध है।TM का मुद्दा सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर काफी कम हो गई है। महिला आरक्षण, एसआइआर समेत अन्य मुद्दों को लेकर सभी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के जरिए मतदाताओं को साधने की पूरी कोशिश है। जिनके नाम काटे गए हैं, उनके परिवार के सदस्यों के रोष का भी असर इस चुनाव में दिखने की प्रबल संभावना है।

भूमि का मालिकाना हक दिलाना बीजेपी को कर है सकता मजबूत
कुछ दिनों पहले भाजपा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि 707 चाय बागानों के साढ़े 3 लाख परिवारों को भूमि के मालिकाना हक का पट्टा देने का पार्टी ने काम भाजपा किया है। पहले चरण में 20 जिलों के 106 बागानों में यह काम पूरा हो चुका है।

हिंदू मतों के बंटने से बीजेपी को नुकसान होने की संभावना
राजनीतिक मामलों के जानकार एम इस्लाम ने कहा कि पश्चिम बंगाल के उत्तरी क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन पिछले कई वर्षों के दौरान अच्छा रहा है। लेकिन इस बार एसआइआर में नाम काटे जाने से मतदाताओं के सभी वर्गों में रोष है। उत्तरी बंगाल में भी हिंदू मतों के बंटने का मतदान पर असर दिखने की प्रबल संभावना है। एसआइआर के मुद्दे को भाजपा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों ही अपने अपने तरीके से मतदाताओं के सामने रख रही है। मतदान से पहले आखिरी वक्त में मतदाताओं का रुख किस दल की तरफ होता है, इसपर प्रदेश के सियासी माहिरों की निगाहें भी टिकी है।

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